रायपुर।नईदुनिया प्रतिनिधि

भारत में स्त्रियों के साथ हमेश अन्याय हुआ है। चाहे वह महाभारत का काल हो या वर्तमान। हर काल में स्त्री छली गई, उसकी अस्मिता, कौमार्य और उसकी इच्छाओं का कभी सम्मान नहीं हुआ। जिसका सचित्र चित्रण एकल नाटक द्रौपदी में दिखाया गया। मुक्तिबोध की जयंती पर छत्तीसगढ़ फिल्म एंड विजुअल आर्ट सोसाइटी की ओर से मुक्ताकाशी मंच पर बुधवार को नाटक का मंचन किया गया। इस नाटक में महाभारत से लेकर वर्तमान में स्त्रियों के साथ हो रहे जुर्म और दुर्व्यवहार को दिखाया गया है। द्रौपदी महाभारत की कालजयी चरित्र है, जिसका उदाहरण आज तक बार-बार दिया जाता है। उसी द्रौपदी को केन्द्र में रख आज के संदर्भ में वर्तमान की नारी की दशा को दिखाने का प्रयास नाटक के माध्यम से किया गया है। आधुनिक भारत में औरतों के संदर्भ में आज भी परिस्थितियों बहुत नहीं बदली हैं, इसलिए यह नाटक और भी प्रासंगिक हो जाता है। असीमा भट्ट का मारक द्रौपदी सदियों से जमा स्त्री मन की गांठों को खोलता है, जिसमें एक स्त्री अपनी कथा को द्रौपदी को केंद्र में रखकर कहती है कि यह द्रौपदी आपको कभी वर्तमान में ले आती है तो कभी महाभारत काल में। पिता, पति, प्रेमी सभी के हाथों और कभी अपने ही निर्णय और चुप्पी का शिकार होती है स्त्री।

नाटक के क्लाइमेक्स में तब आता है जब नाटक के पात्र कहता है कि स्त्री मन और जीव का आईना है द्रौपदी, महाभारत काल में तो द्रौपदी के सखा भगवान कृष्ण उसे बचाने आये थे किन्तु आज की स्त्री का सरेआम चीरहरण, बलात्कार होता है और कोई कृष्ण बचाने नहीं आता। सभी देखते रह जाते हैं बचाने वाला कोई नहीं होता। हमलोगों को श्रीकृष्ण बनना होगा।

आज खेला जाएगा नाटक 'प्रेम पॉलिटिक्स'

गुरुवार को शाम सात बजे नाटक 'प्रेम पॉलिटिक्स' नाटक का मंचन होगा। रंगदूत सीधी मध्यप्रदेश की इस नाट्य प्रस्तुति के लेखक और निर्देशक प्रसन्न सोनी ने किया है। नाटक नदियों की प्रेम कथा है। नाटक प्रेम का नाटक नहीं बल्कि दिन ब दिन प्रेम में घुलती जा रही नफरत और हिंसा का नाटक है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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