रायपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

प्रदेश में संचालित कंपनियों के धर्मकांटों को ऑनलाइन करने की योजना खटाई में पड़ती दिखाई दे रही है। परिवहन विभाग कंपनियों के भीतर लगे धर्मकांटों को ऑनलाइन करने की प्रक्रिया पिछले चार माह से कर रहा है, लेकिन अभी तक पूरी नहीं कर पाया है। इसकी वजह यह है कि कंपनी के धर्मकांटे को ऑनलाइन करने के लिए नापतौल विभाग से अनुमति लेनी पड़ती है, जो नहीं ली जा सकी है।

परिवहन विभाग के अधिकारी का कहना है कि कुछ कंपनियों के धर्मकांटे को विभाग के सर्वर से जोड़कर ट्रायल का काम पूरा कर लिया गया है। जो पुराने धर्मकांटे हैं उनको ऑनलाइन करने के लिए नापतौल विभाग की अनुमति लेनी पड़ती है। नापतौल विभाग से अनुमति के लिए प्रक्रिया चल रही है।

प्रदेश भर में धड़ल्ले से ओवरलोड वाहन चल रहे हैं, फैक्टरियों में आ-जा रहे हैं। इसकी शिकायत पर बीते दिनों विभाग ने रायपुर की कुछ बड़ी कंपनियों में माल लाने-ले जाने वाले वाहनों की जांच की थी। बड़ी संख्या में वाहन ओवरलोड पाए गए थे। इसके बाद परिवहन विभाग और नापतौल विभाग के अधिकारियों ने बैठक कर धर्मकांटे को ऑनलाइन करने का निर्णय लिया था। अभी भी ओवरलोड वाहन दौड़ रहे हैं, और कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति हो रही है।

यह था दावा

परिवहन विभाग का दावा था कि प्रदेश भर के सभी धर्मकांटों को परिवहन विभाग के वाहन नामक सॉफ्टवेयर से जोड़ा जाएगा। इससे खदानों और फैक्टरियों से निकलने वाले वाहनों की सीधे मॉनिटरिंग होगी। इससे ओवरलोड वाहनों पर ऑनलाइन चालानी कार्रवाई भी होगी। चालानी कार्रवाई का शुल्क वाहन मालिक के खाते से ऑनलाइन कर लिया जाएगा।

वजन कराते ही विभाग को मिल जाएगी जानकारी

परिवहन विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक प्रदेश भर में करीब 2200 धर्मकांटे हैं। फैक्टरियों-खदानों से निकलने वाले वाहन धर्मकांटे पर वजन कराते हैं, फिर गंतव्य को रवाना होते हैं। प्रदेश भर के वाहनों की कुंडली 'वाहन' सॉफ्टवेयर में है। इसमें गाड़ी नंबर डालने से वाहन की सारी जानकारी मिल जाती है। धर्मकाटों को इस सॉफ्टवेयर से जोड़ने से धर्मकांटे में वजन के लिए जाने वाले वाहनों के लोड की जानकारी परिवहन विभाग को मिल जाएगी।

ऐसे चुकानी पड़ेगी फीस

परिवहन विभाग के अधिकारी ने बताया कि फाइन नियमानुसार किया जाता है। मान लीजिए किसी वाहन में सात टन ओवरलोड पाया गया तो पहले टन का नौ हजार रुपये फाइन, उसके बाद के प्रत्येक टन पर तीन-तीन हजार रुपये फाइन किया जाता है। वाहन स्वामी को धर्मकांटे पर ही चालान की राशि अदा करनी पड़ेगी। यदि वाहन स्वामी या चालक के पास पैसे नहीं हैं तो वह परिवहन कार्यालय में जाकर पटा सकेगा।

वर्जन

धर्मकांटे को ऑनलाइन करने के लिए नापतौल विभाग से अनुमति लेनी पड़ती है। नापतौल विभाग से अनुमति के लिए प्रक्रिया चल रही है, जल्द ही धर्मकांटे को ऑनलाइन किया जाएगा।- शैलाभ साहू, आरटीओ, रायपुर