रायपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

आरटीओ कार्यालय में निर्माणाधीन ऑटोमेटिक फिटनेस सेंटर का बजट के अभाव में काम नहीं हो पा रहा है। इससे गाड़ियों के फिटनेस की जांच आरटीओ के अधिकारियों को मैन्युअली करना पड़ रहा है। परिवहन विभाग के अधिकारियों ने कई बार फंड के लिए केन्द्र से पत्राचार किया है,लेकिन अभी तक फंड जारी नहीं हुई। इस मामले में परिवहन मंत्री ने फिटनेस सेंटर का काम जल्द पूरा हो इसके लिए विभाग को मदद का आश्वासन दिया है। परिवहन मंत्री ने रायपुर आरटीओ को निर्देशित किया है कि प्रदेश के परिवहन मंत्रालय से किस तरह मदद की जा सकती है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि यदि केंद्र सरकार को पत्र लिखना होगा तो भी हम तैयार हैं, लेकिन जल्द से काम पूरा करने का आदेश दिया है।

ज्ञात हो कि राजधानी में कुल 10 लाख छोटी-बड़ी गाड़ियां पंजीकृत हैं। रायपुर आरटीओ कार्यालय में एक दिन में कुल 150 व एक माह में कुल 4500 गाड़ियां फिटनेस की जांच कराने पहुंच रही हैं। फिटनेस की जांच के दौरान एक गाड़ी को मानक के अनुरूप कम से कम 10 से 15 मिनट का समय देना है, लेकिन गाड़ियों की संख्या अधिक होने से फिटनेस की जांच करने वाले अधिकारी खानापूर्ति करते हैं, वहीं भाई -भतीजावाद के चलते भी सिर्फ खाना पूर्ति की जाती है। इससे सड़क पर अक्सर गाड़ियों से जहरीला धुआं निकलते नजर आते हैं। इसको देखते हुए केंद्र सरकार ने फिटनेस सेंटर बनाने की योजना बनाई थी। जबकि इसका मकसद है कि गाड़ियों के फिटनेस में किसी प्रकार की धांधली नहीं होने पाएगी। इसके साथ ही रोड पर चलने वाली गाड़ियां पूरी तरह से फिट रहें। इससे राजधानी में होने वाले सड़क हादसे पर भी लगाम लगेगी।

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14 करोड़ 40 लाख की लागत से बन रहा फिटनेस सेंटर

आरटीओ कार्यालय में बन रहे फिटनेस सेंटर की लागत 14 करोड़ 40 लाख रुपये है। इसे बनाने का जिम्मा इंटरनेशनल सेंटर ऑटोमोटिव टेक्नोलॉजी को दिया गया है। केंद्र सरकार ने इसके लिए महज छह करोड़ रुपये ही जारी किए हैं। बाकि 8.40 करोड़ रुपये अभी तक जारी नहीं हुआ है। इसके कारण काम अटका है, जबकि इसे फरवरी 2019 में पूरा करना था।