रायपुर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। प्लाज्मा सेल के कैंसर मल्टीपल मायलोमा के लिए उपलब्ध नवीन तकनीक और इसके उपचार की विधि के बारे में चिकित्सकों को जानकारी प्रदान करने के उद्देश्य से अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के तत्वावधान में दो दिवसीय राष्ट्रीय कांफ्रेंस संपन्न हुई। इसमें मल्टीपल मायलोमा के रोगियों का नवीन तकनीक की मदद से उपचार पर जोर दिया गया। इस अवसर पर स्टेम सेल और बोन मेरो के उपचार के बारे में जानकारी दी गई। कांफ्रेंस का उद्घाटन करते हुए निदेशक प्रो. (डा.) नितिन एम. नागरकर ने मल्टीपल मायलोमा पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि इसके रोगी किसी भी विभाग के पास पहुंच सकते हैं। अत: इनकी पहचान कर समन्वय के साथ उपचार उपलब्ध कराना प्राथमिकता है। एम्स का प्रयास है कि उपचार, प्रबंधन और फालोअप की सुविधा एक ही स्थान पर मिले। इसके लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।

नई तकनीक से आधुनिक उपचार

देश के प्रमुख हिम्टोलाजिस्ट कटक के प्रो. रबिंद्र कुमार जेना ने कहा कि नई तकनीक की मदद से मल्टीपल मायलोमा के रोगियों को आधुनिक उपचार प्रदान किया जा सकता है। इसमें स्टेम सेल का उपचार भी शामिल है। उन्होंने कहा कि कोविड के बाद अब प्रत्येक बीमारी के इलाज के लिए अधिक जागरूकता आ गई है। ऐसे में चिकित्सकों को भी नई तकनीक की मदद से रोगियों को बेहतर उपचार प्रदान करना होगा। डीन (अकादमिक) प्रो. आलोक चंद्र अग्रवाल ने मल्टीपल मायलोमा के लिए नवीन उपचार विधि उपलब्ध कराने पर जोर दिया। प्रो. विनय पंडित ने सभी चिकित्सकों का स्वागत किया। कांफ्रेंस में डॉ. आशुतोष पाणिग्रही, एम्स भुवनेश्वर और डॉ. नवीन खत्री, मुंबई ने मल्टीपल मायलोमा के उपचार के बारे में विस्तार से जानकारी प्रदान की। कांफ्रेंस आयोजन में डॉ. सरोज बाला, डॉ. अमित कुमार, डा. पंकज कुमार कन्नाौजे और डा. अविनाश तिवारी का सहयोग रहा।

Posted By: Ashish Kumar Gupta

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