रायपुर। मरीज को चारपाई या कंधे पर लादकर कई किलोमीटर का सफर तय करके अस्पताल पहुंचाने की तस्वीरें राज्य के दुर्गम क्षेत्रों से अक्सर आती हैं। कई बार अस्पताल पहुंचने में इतनी देर हो जाती है कि मरीज की जान नहीं बच पाती है, तो कभी बैगा- गुनिया के चक्कर में उनकी जान चली जाती है।

इसको देखते हुए सरकार ने इसी वर्ष जून में बस्तर और दंतेवाड़ा जिले के हाट- बाजारों में मेडिकल टीम भेजने की पहल की थी। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के अनुसार इस प्रयोग के परिणाम अत्यंत उत्साहवर्धक रहे। इसे देखते हुए सरकार ने अब राज्य के सभी दुर्गम क्षेत्रों के सभी हाट-बाजारों में दो अक्टूबर से इलाज की सुविधा प्रारंभ करने का निर्णय लिया है।

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सभी सुविधाओं के साथ पहुंचेगी मेडिकल टीम

हाट-बाजारों में मेडिकल टीम भेजी जाएगी, जिसमें डॉक्टर, पैरामेडिकल स्टॉफ के साथ पर्याप्त दवाएं और मोबाइल चिकित्सा यूनिट भी होगी। हाट-बाजारों में ग्रामीण चिकित्सकीय परामर्श ले सकेंगे और उनका उपचार भी किया जाएगा।

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17 सितंबर तक मांगी गई कार्ययोजना

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस संबंध में सभी जिला कलेक्टरों को पत्र लिखकर विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने अपने-अपने जिलों में हाट-बाजारों का चिन्हांकन कर वहां सुसज्जित मोबाइल चिकित्सा यूनिट भेजने के लिए कार्य योजना 15 सितंबर तक प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

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संसाधनों की उपलब्धता पर मांगी रिपोर्ट

मुख्यमंत्री ने कलेक्टरों को अपने-अपने जिले में ऐसे हाट-बाजारों का चिन्हांकन करने और प्रतिदिन लगने वाले बाजारों के संख्या के अनुरूप मेडिकल दलों की व्यवस्था करने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा है कि यदि जिले में संसाधनों में कोई कमी है, तो उसकी पूर्ति के लिए कार्ययोजना तैयार कर ली जाए। प्रयोग के तौर पर सभी जिलों में बड़े हाट-बाजारों में चिकित्सक दल भेजने का कार्य प्रारंभ किया जाए और प्रत्येक बाजार में आने वाले मरीजों तथा उनके उपचार का पृथक से लेखा-जोखा रखा जाए।

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