रायपुर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। Paryushan 2021: दिगंबर जैन समाज के पर्युषण पर्व के पांचवे दिवस उत्तम सत्य धर्म की पूजा आराधना की गई। दशलक्षण पर्व में वास्तव में भगवान की पूजा आराधना नही की जाती बल्कि आत्मा के मूल गुणों की पूजा की जाती है। क्षमा, मार्दव, आर्जव, शौच, सत्य, संयम, तप, त्याग, आकिंचन, ब्रह्मचर्य ये सभी आत्मा के वास्तविक गुण हैं। इन्हीं दस गुणों की ही पूजा की जाती है, जिन्हें अपनाकर मानव परमात्मा बनने के मार्ग पर अग्रसर हो सकता है।

श्री पद्मप्रभ भक्त परिवार के सदस्य अरविंद जैन ने बताया कि बताया कि सांसारिक व्यक्ति इन सब का लोप कर विपरीत जीवन जीता है और लौकिक , पारलौकिक दोनो भवों को बिगाड़ लेता है। इसके विपरीत वीतरागी साधु आत्मा के मूल गुणों को अंगीकार कर अगले भव में उच्च स्थान प्राप्ति के मार्ग पर अग्रसर होता है।

मनुष्य क्रोध, लोभ, भय, हंसीमजाक के कारण झूठ बोलता है और समाज, परिवार सभी स्थानों में उपहास का कारण बन पाप अर्जित करता है। किसी के प्राणों की रक्षा करने के लिये बोला गया झूठ भी सत्य की ही श्रेणी में आता है। अकारण ही झूठ बोलना अत्यंत पाप है। सत्य बोलकर सत्य धर्म अपनाकर अगले भव को सुरक्षित करना चाहिए।

दशलक्षण पर्व के पांचवे दिन श्री आदिनाथ भगवान की प्रतिमा में शांतिधारा करने का सौभाग्य रासु बडजात्या , विवेक मोदी , सूजीत जैन व प्रसन्न जैन को प्राप्त हुआ। शांतिधारा का पठन वैदिका बड़जात्या ने और भजनों की प्रस्तुति सुजीत जैन, वेदिका बडजात्या ने दी। कल्याणक महोत्सव के अंतर्गत निर्वाण कांड के पठन के साथ निर्वाण लाडू समर्पित किया गया।

Posted By: Shashank.bajpai

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