रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार की स्टार्टअप को बढ़ावा देने की योजना के तहत यहां 102 स्टार्टअप शुरू हुए। मार्च 2019 की स्थिति में इनमें 712 लोगों को रोजगार मिला और इनका कुल टर्नओवर 97 करोड़ स्र्पये था। वित्तीय वर्ष 2018-19 के परर्फोंस बजट में सरकार ने यह जानकारी दी है। सरकार ने इसे लिए कोर इनक्यूबेटर-सह- एक्सेलरेट संस्थान की स्थापना की है।

परर्फोंस बजट में सरकार ने बताया है कि 102 स्टार्टअप में से आठ कृषि और खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में काम कर रहे हैं। नौ स्वास्थ्य, 12 शिक्षा, 17 साफ्टवेयर उद्योग में काम कर रहे हैं। अन्य उद्योगों में 56 स्टार्टअप में से एक भारत की थ्रीडी प्रिंटर निर्माताओं में अग्रणी है। रायपुर के सिटी सेंटर में स्थापित 36आइएनसी छत्तीसगढ़ के 20 कॉलेजों और विश्वविद्यालयों को उनके परिसर में इनक्यूबेटर स्थापित करने में मदद कर रहा है।

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स्वीकृति में अटकी उच्च शिक्षा ब्याज अनुदान की योजना

राज्य सरकार ने तकनीकी और व्यवसायिक पाठ्यक्रमों में शिक्षा ग्रहण करने वाले निर्धन परिवार के बच्चों के लिए मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा ब्याज अनुदान योजना शुरू की। वर्ष 2018-19 में योजना के तहत 15 सौ विद्यार्थियों को लाभ पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन प्रशासकीय व वित्तीय स्वीकृति नहीं मिलने के कारण किसी को भी योजना का लाभ नहीं मिल पाया।

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12 लाख लोगों का फीडबैक लेने में खर्च हुए 63 करोड़

राज्य की पूर्ववर्ती भाजपा सरकार ने सरकार की योजनाओं के संबंध में आम लोगों से फीडबैक लेने के लिए एक कॉल सेंटर स्थापित की थी। परर्फोंस बजट में बताया गया है कि योजना के तहत 12 लाख लोगों से संपर्क किया गया और उनकी प्रतिक्रियाएं एकत्र की गई। इस योजना पर करीब 63 करोड़ स्र्पये खर्च हुए हैं। आउटसोर्सिंग पर चल रही इस योजना को अब बंद कर दिया गया है।

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किशोरी शक्ति योजना बंद

किशोरियों को अतिरिक्त पूरक पोषण उपलब्ध कराने की किशोरी शक्ति योजना को सरकार ने बंद कर दिया है। वर्ष 2018-19 में योजना के तहत 28 हजार किशोरियों को लाभांवित करने की योजना थी, लेकिन योजना बंद कर दी गई। महिला एवं बाल विकास विभाग के अफसरों के अनुसार इसके स्थान पर सबला योजना शुरू की गई। इसमें 11 से 14 वर्ष की शाला त्यागी और 14 से 18 वर्ष की सभी बच्चियों को पूरक पोषण आहार उपलब्ध कराया जाता है। इस योजना के तहत 17 हजार 715 किशोरियों को पूरक पोषण आहार उपलब्ध कराया गया।

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साढ़े सात लाख घरों तक पहुंची उज्ज्वला

प्रधानमंत्री उज्ज्वाला योजना के तहत तीन वर्ष में राज्य के 35 लाख गरीब परिवारों को एलपीजी कनेक्शन देने का लक्ष्य रखा गया था। इसमें से 2018-19 में 10 लाख परिवारों को गैस कनेक्शन दिया जाना था। परर्फोंस रिपोर्ट के अनुसार कुल सात लाख 51 हजार घरों तक ही गैस कनेक्शन पहुंच पाया।