रायपुर। छत्तीसगढ़ में बायोडीजल कांप्लेक्स बनाने के लिए चेन्नेई और गौहाटी की दो कंपनियों ने एमओयू किया गया है। ये कंपनियां इस क्षेत्र करीब 95 करोड़ रुपए का निवेश करेंगी। गुरूवार को इस संबंध में कार्यशाला भी आयोजित की गई।

मुख्यमंत्री डा.रमन सिंह ने बताया कि हमार लक्ष्य राज्य में वर्तमान में उपलब्ध रतनजोत के एक लाख 26 हजार हेक्टेयर के क्षेत्र को और भी विस्तारित करने का है। मुख्यमंत्री के सामने बायोफ्यूल विकास प्राधिकरण और दो निजी निवेशकों के बीच राज्य में बायो डीजल काम्पलेक्स विकसित करने के लिए दो अलग-अलग एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए। एमओयू चेन्नेई की कम्पनी मेसर्स ग्रीन एनर्जी और गौहाटी (असम) की कम्पनी मेसर्स भूमा एनर्जी-आईआईटी के बीच हुए हैं। प्राधिकरण की ओर से कार्यपालन निदेशक एसके शुक्ला ने और दोनों कम्पनियों की ओर से उनके प्रतिनिधियों ने हस्ताक्षर किए। बायोडीजल काम्पलेक्स में रतनजोत और अन्य अखाद्य तेलों से बनने वाले बायो डीजल के कचरे का उपयोग जैविक खाद, जैविक किट नाशक, कधो ग्लिसरीन आदि के उत्पादन में भी किया जा सकेगा।

इस अवसर पर पूर्व केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्री और वर्तमान में केन्द्र सरकार के बायोफ्यूल प्रकोष्ठ के अध्यक्ष अन्नाा साहेब पाटिल, छत्तीसगढ़ राज्य अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण (क्रेडा) के अध्यक्ष पुरन्दर मिश्रा, ऊर्जा विभाग के अपर मुख्य सचिव एन बैजेन्द्र कुमार और अन्य वरिष्ठ अधिकारी तथा बायोडीजल के क्षेत्र में कार्यरत विभिन्ना कम्पनियों के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

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