रायपुर(ब्यूरो)। महासमुंद जिले में वन विकास निगम की जमीन पर 75 अपात्र लोगों को पट्टा दिए जाने का मामला बुधवार को विधानसभा में जोरशोर से उठा। मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने स्वीकार किया कि वन विकास निगम की जमीन पर 75 अपात्र लोगों को वन अधिकार मान्यता पत्र वितरित किए गए हैं। इन 75 लोगों के मान्यता पत्रों को निरस्त करने की कार्रवाई कलेक्टर महासमुंद ने प्रारंभ कर प्रकरण में यथास्थित के आदेश जारी कर दिए हैं। उन 75 लोगों ने अवैध कटाई कर अतिक्रमण का प्रयास किया है, उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा रही है। एसडीओ (राजस्व) व एसडीओ (वन) को निलंबित कर इस पूरे मामले की वन संरक्षक स्तर के अधिकारी से जांच कराई जाएगी।

निर्दलीय विधायक विमल चोपड़ा ने ध्यानाकर्षण सूचना के माध्यम से यह मामला उठाया। उन्होंने कहा कि महासमुंद जिले के ग्राम मालीडीह में ऐसे गैर-आदिवासी 25 लोगों को वनभूमि पर वन अधिकार पट्टा वितरित किया गया है, जिनका उस भूमि पर न तो कब्जा रहा है और न ही उन्होंने वहां खेती की है। नियम विरूध्द 25 लोगों को दिए गए पट्टे में दो को छोड़कर सभी गैर आदिवासी हैं और उनके पास उनके ग्राम मालीडीह में पांच एकड़ से लेकर बीस एकड़ तक जमीन, पक्का मकान, ट्रैक्टर, हार्वेस्टर, कार, मोटरसाइकिल आदि की सुविधाएं हैं।

मुख्यमंत्री ने अपने जवाब में स्वीकार किया कि महासमुंद जिले के मालीडीह के पास स्थित वन विकास निगम की जमीन पर अतिक्रमण का प्रयास किया गया था और सागौन पौधरोपण को क्षति पहुंचाई गई थी, जिस पर त्वरित कार्रवाई करते हुए वन अपराध दर्ज कर अतिक्रमणकारियों के प्रयास को विफल किया गया। इसके बाद संबंधित व्यक्तियों द्वारा वनभूमि पर कोई क्षति या कब्जे का प्रयास नहीं किया। अगस्त 2013 में ग्रामसभा में ग्राम स्तरीय वन अधिकार समिति की बैठक में इन 25 व्यक्तियों के पंचनामा पर समिति के सदस्यों ने ग्रामीणों के दावों पर प्रश्नाधीन वन भूमि पर सागौन पौधरोपण वर्ष 1997 का होने और सभी दावाकर्ताओं पर वन अपराध प्रकरण दर्ज होने के कारण आपत्ति दर्ज की। परंतु ग्राम स्तरीय वन अधिकार समिति के अभिमत में उन्हें पात्र दर्शाया गया तथा इस आधार पर वन अधिकार पत्र प्रदाय किए गए। इन 25 व्यक्तियों द्वारा पुनः जुलाई 2014 को वन विकास निगम की जमीन पर अतिक्रमण का प्रयास किए जाने पर उनके विरूध्द वन अपराध प्रकरण दर्ज किया गया। इसके अलावा वन विकास निगम के वन क्षेत्र के अंतर्गत 50 अपात्र व्यक्तियों को वन अधिकार मान्यता पत्र दिए गए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि चूंकि इस प्रकरण में अपात्र व्यक्तियों को वन अधिकार मान्यता पत्र दिए गए हैं, इसलिए इन 75 व्यक्तियों के मान्यता पत्रों को निरस्त करने की कार्रवाई करते हुए कलेक्टर द्वारा यथास्थति बनाने के आदेश जारी किए गए हैं। संबंधित दोषी एसडीओ (राजस्व) व एसडीओ (वन) को निलंबित किया जा रहा है।