रायपुर। डॉ. भीमराव अंबेडकर अस्पताल में 13 साल की ऐसी किशोरी का इलाज चल रहा है, जो एक बेहद असामान्य बीमारी की शिकार है। बीते 35 दिन में उसका 4 बार हार्ट अटैक आ चुका है। डॉक्टर खुद इस बीमारी से अचंभित हैं, 10 लाख में किसी एक व्यक्ति को होने वाली इस बीमारी का नाम है 'टाकायासू आर्टराइसिस'। फिलहाल गंगा ठीक है, उसे बुधवार को अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया है, लेकिन डॉक्टर्स ने उसे जल्द ही फालोअप के लिए बुलाया है।

नांदघाट जिला महासमुंद की रहने वाली गंगा एक सामान्य लड़की की तरह ही दिखती है। अंबेडकर अस्पताल के इतिहास में यह पहला केस है। 27 जुलाई को गंगा के परिजन उसे बदन दर्द की शिकायत पर अंबेडकर अस्पताल लेकर आए थे। जहां डॉक्टर्स ने उसकी जांच की, पहले डॉक्टर्स भी उसे सामान्य बच्चों की तरह ही ट्रीटमेंट दे रहे थे। क्योंकि उन्हें इस असामान्य बीमारी के बारे में जानकारी नहीं थी।

इसी दौरान गंगा को एक के बाद एक हार्ट अटैक आने शुरू हो गए, कड़ी मशक्कत के बाद उसकी जान तो बचा ली गई, लेकिन डॉक्टर्स के सामने सवाल यह था कि उसे हुआ क्या है? अस्पताल के शिशुरोग विशेषज्ञ डॉ. वीरेंद्र कुर्रे और डॉ. कनक रमनानी ने उसकी स्थिति को देखते हुए उसकी नसों की जांच करने का फैसला लिया। डीएसए मशीन से उसकी नसों की जांच करवाई गई और तब यह साफ हो गया कि गंगा 'टाकायासू आर्टराइसिस' बीमारी से पीड़ित है। सूत्र बताते हैं कि अगर स्थिति और ज्यादा बिगड़ती है तो डॉक्टर्स उसे दिल्ली एम्स भी रेफर कर सकते हैं।

लक्षण-

थकावट, हाथ-पैर में दर्द, वजन का एकाएक कम होना, मांसपेसियों में दर्द और कभी-कभी बुखार भी आ सकता है। कुछ समय बाद जब हाई ब्लड प्रेशर, सांस फूलना आदि। नसों में सिकुड़न आ जाती है जिसकी वजह से ब्लड प्रेशर बढ़ता है। डॉक्टर्स के मुताबिक खून की नसों में सूजन इस बीमारी का एक बड़ा लक्षण है। खासतौर पर यह बीमारी लड़कियों में होती है।

इलाज नहीं मिला तो-

अगर इस बीमारी से पीड़ित व्यक्ति को समय पर इलाज नहीं मिला तो धमनियां कड़ी हो जाती हैं, ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है, हार्ट में सूजन आ जाती है, हार्ट फेल हो जाता है, फेफड़े संबंधित बीमारी हो सकती है।

नस नहीं मिलती है

गंगा एक असामान्य बीमारी की शिकार है, ऐसी बीमारी 10 लाख में एक मरीज को होती है। अंबेडकर में तो यह पहला केस है, जिसका इलाज हम कर रहे हैं। एशिया और भारत में इसके मरीज ज्यादा मिले हैं। आप आश्चर्य में पड़ जाएंगे कि उसे 4 हार्ट अटैक आ चुके हैं। यह बीमारी पल्सलेस होती है, नस नहीं मिलती है।

डॉ. वीरेंद्र कुर्रे, एसोसिएट प्रोफेसर, डॉ. भीमराव अंबेडकर अस्पताल