रायपुर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। राजधानी में यूनियन बैंक की एक शाखा में हुए साढ़े पांच करोड़ के सिक्का घोटाले की जांच सीबीआइ के हाथों में जा सकती है। सूत्रों का कहना है कि सीबीआइ जांच में और भी तथ्य सामने आ सकते हैं। सीबीआइ को सौंपे जाने के पीछे वजह यह है कि तीन करोड़ से अधिक के घोटाले की जांच सीबीआइ करती है। पुलिस की जांच में अब तक कुछ भी हाथ नहीं लगा है और मुख्य आरोपित भी पकड़ से बाहर है। अभी बैंक की विजिलेंस टीम जांच कर रही है।

प्रियदर्शिनी नगर स्थित यूनियन बैंक के शाखा प्रबंधक ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इसमें जगन्नााथ नगर गुरु गोविंद सिंह वार्ड निवासी कैशियर किशन बघेल को दोषी बताया गया है। मूल रूप से खरियार रोड का रहने वाला मुख्य आरोपित किशन 25 मार्च के बाद से फरार है। बैंक प्रबंधन ने पिछले हफ्ते कैशियर समेत सात कर्मचारियों को निलंबित किया। किशन 31 अगस्त 2017 से मुख्य कैशियर के पद पर कार्यरत था। बताया गया है कि निलंबित कर्मचारी कैशियर के साथ कार्यरत थे।

सूदखोरी का काम करता था किशन

बताया जा रहा है कि किशन सूदखोरी का काम करता था। उसने अपने सात कर्जदारों के खाते बैंक में खुलवाए थे। कर्जदारों की पासबुक, एटीएम कार्ड को अपने कब्जे में रखा था।

एक ही दिन जमा हुए दो करोड़ से अधिक के सिक्के

जांच में यह पाया गया है कि सात खातों में 25 मार्च 2022 को बड़ी रकम जमा की गई। जमा पर्चियों में जमाकर्ता के हस्ताक्षर नहीं हैं। किशन व अन्य द्वारा फर्जीवाड़ा कर राशि ट्रांसफर की गई। बैंक की शिकायत में बताया गया है कि 24 मार्च 2022 को शाखा में नकद चार करोड़ 80 लाख 58 हजार 988 रुपये थे, जो 25 मार्च को बढ़कर छह करोड़ 23 लाख 10 हजार 663 रुपये हो गए। शाखा में 24 मार्च को सिक्कों के रूप में तीन करोड़ 46 लाख 59 हजार 338 रुपये थे, जो 25 मार्च को बढ़कर पांच करोड़ 61 लाख 10 हजार 333 रुपये हो गए। इस प्रकार एक ही दिन दो करोड़ 14 लाख 50 हजार 995 रुपये के सिक्के बढ़ गए।

और तथ्य सामने आएंगे

यूनियन बैंक में हुए इस घोटाले को दो माह से अधिक हो चुके है और अभी तक मुख्य आरोपित फरार है। बैंक अगर चाहे तो यह मामला सीबीआइ के सुपुर्द भी कर सकता है। सीबीआइ जांच होती है तो इसमें और भी तथ्य सामने आएंगे।

शिरीष नलगुंडवार, महामंत्री, छत्तीसगढ़ बैंक एम्पलाइज फेडरेशन

Posted By: Ashish Kumar Gupta

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