रायपुर। Upanayan Ceremony: कोरोना का प्रकोप कम होने के साथ ही अब धार्मिक व सामाजिक आयोजनों ने एक बार फिर रफ्तार पकड़ना शुरू कर दिया है। पिछले कई महीनों से राज्य शासन की गाइडलाइन की वजह से सार्वजनिक आयोजनों पर रोक लगी थी, लेकिन अब जिला प्रशासन द्वारा समारोह में छूट मिलने के बाद सार्वजनिक कार्यक्रमों के जरिये समाजों में रौनक लौटने लगी है। रविवार को शदाणी दरबार में ऐसा ही नजारा दिखाई दिया।

आचार्य गणों के सान्निध्य में विधि-विधान से मंत्रोच्चार के साथ 40 बटुकों का उपनयन (जनेऊ) संस्कार संपन्न कराया गया। इस दौरान बच्चे, युवा और अभिभावकों में गजब का उत्साह देखने को मिला। इस दौरान सामूहिक विवाह में पांच दूल्हों की बारात भी निकली गई। दोपहर बाद दरबार तीर्थ में पांच जोड़ों का विवाह धूमधाम से हुआ। सबसे पहले वधु पक्ष ने वर पक्ष का स्वागत किया। एक साथ सभी दूल्हों का मुकुट बंधन रस्म निभाई गई। पांच दूल्हों के विवाह को देखने काफी संख्या में सिंधी समाज के लोग जुटे।

जनेऊ धारण करने से यज्ञ हवन का अधिकार

शदाणी दरबार के नवम पीठाधीश्वर संत युधिष्ठिर लाल के सान्निध्य में 17वां वार्षिक जनेऊ एवं सामूहिक विवाह में महीनों बाद खुशी की लहर छाई रही। संतश्री ने कहा कि सनातन धर्म की मर्यादा अनुसार जनेऊ धारण करने से ज्ञान में बढ़ोतरी होती है। माता पिता और गुरु की सेवा व भक्ति की प्रेरणा मिलती है। यज्ञ-हवन करने का अधिकार प्राप्त होता है।

समारोह में मुख्य अतिथि महामण्डलेश्वर स्वामी विशोकानंद भारती, पंडित रामचंद्र शास्त्रीगल के मार्गदर्शन में सभी संस्कार पूरे हुए। समाज के लोगों के लिए दिनभर लंगर चलता रहा। कार्यक्रम में शदाणी सेवा मंडल रायपुर, दुर्ग, भिलाई के सेवक, संत शदाणी नगर की पूज्य पंचायत, शहर की पूज्य पंचायतों के मुखीगण व छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र से भी समाज के लोग शामिल हुए।

Posted By: Shashank.bajpai

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