रायपुर। प्रदेश के बाद अब शहरी सत्ता के लिए होने वाले चुनाव में भी कांग्रेस बम्पर जीत हासिल करना चाहेगी, क्योंकि प्रतिष्ठा दांव पर लगी होगी। इस कारण न केवल महापौर और अध्यक्ष, बल्कि पार्षद के प्रत्याशियों का चयन भी काफी मंथन करने के बाद किया जाएगा। पहले तो पार्टी सभी 13 नगर निगम, 44 नगर पालिका और 111 नगर पंचायतों के पार्षदों से उनके पांच साल के कामकाज का लेखा-जोखा लेगी। पार्षदों का परफॉर्मेंस चेक करने के लिए जिला और ब्लॉक कमेटियों के माध्यम से सर्वे कराया जाएगा। इसके बाद तय होगा कि किस पार्षद को फिर से मैदान में उतारा जाए और किसका पत्ता साफ कर दिया जाए।

15 साल विपक्ष में रहने के बाद कांग्रेस के हाथ में प्रदेश की सत्ता आई है। 90 विधानसभा सीटों में से 68 में जीत का बड़ा कारण पूर्ववर्ती भाजपा सरकार के खिलाफ जनता की नाराजगी का फूटना था। अभी लोकसभा चुनाव का नतीजा आना बाकी है। हालांकि, विधानसभा और लोकसभा चुनाव से नगरीय निकाय चुनाव अलग होता है, क्योंकि इसमें वार्ड स्तर के मुद्दों पर चुनाव लड़े जाते हैं।

पिछले चुनावों में यह देखने को मिला है, कि विधानसभा और लोकसभा चुनाव का असर नगरीय निकाय चुनाव पर नहीं पड़ता है। 2013 के विधानसभा और 2014 के लोकसभा चुनाव की बात करें, तो दोनों चुनावों में भाजपा भारी पड़ी थी, लेकिन इन दोनों चुनावों के बाद हुए नगरीय निकाय चुनाव में बड़े शहरों पर कांग्रेस का कब्जा हुआ था। रायपुर, भिलाई, अंबिकापुर, कोरबा और जगदलपुर में कांग्रेस के महापौर चुने गए थे।

इसलिए, अब नगरीय निकाय चुनाव में कांग्रेस और भाजपा की असली परीक्षा होगी। कांग्रेस के लिए चुनौती इसलिए ज्यादा है कि अभी 168 नगरीय निकायों के 3217 वार्डों में से 1487 में भाजपा के पार्षद हैं, जबकि 1219 वार्ड में कांग्रेस और 511 वार्ड में निर्दलीय व अन्य क्षेत्रीय दलों के पार्षद हैं। भाजपा से 268 वार्ड कांग्रेस के पास कम हैं। सत्ताधारी दल होने के नाते कांग्रेस न केवल इन वार्डों, बल्कि निर्दलीय व क्षेत्रीय दलों के कब्जे वाले वार्ड में भी सेंध मारने की कोशिश करेगी।

नगर निगम में सेंध लगाने की होगी कोशिश

वर्ष 2014 के नगरीय निकाय चुनाव में 13 नगर निगम में से पांच में कांग्रेस और छह बिलासपुर, दुर्ग, धमतरी, राजनांदगांव, बीरगांव, भिलाई-चरौदा में भाजपा के महापौर जीत थे। रायगढ़ और चिरमिरी में निर्दलीय महापौर चुने गए थे। हालांकि, अब चिरमिरी के महापौर ने कांग्रेस में वापसी कर ली है, तो अभी कांग्रेस के पास छह महापौर की कुर्सियां हैं। कांग्रेस अपनी कुर्सियां बचाते हुए भाजपा की महापौर वाली कुर्सियों में सेंध लगाना चाहेगी।


निकाय-वार्ड-कांग्रेस-भाजपा-अन्य

168-3217-1219-1487-511


13 में से छह नगर निगम कांग्रेस के महापौर

पार्टी-महापौर-सभापति-पार्षद

कांग्रेस-06-06-259

भाजपा-06-07-315

अन्य-01-00-114


44 नगर पालिका में से 20 में कांग्रेस के अध्यक्ष

पार्टी-अध्यक्ष-उपाध्यक्ष-पार्षद

कांग्रेस-20-11-324

भाजपा-18-30-402

अन्य-06-02-138


112 नगर पंचायतों में से 53 में कांग्रेस के अध्यक्ष

पार्टी-अध्यक्ष-उपाध्यक्ष-पार्षद

कांग्रेस-53-47-636

भाजपा-40-59-770

अन्य-18-05-259

Posted By: Hemant Upadhyay