रायपुर। Raipur News : राजनांदगांव जिले में कोरोना काल और ठिठुरती ठंड में छोटे बच्चों व बुजुर्गों के साथ अतिक्रमण तोड़फोड़ में प्रभावित हुए परिवार के लोग जंगल में खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हो गए हैं। प्रशासन ने एक ही दिन में मोहला से गोटाटोला रोड किनारे झुग्गी-झोपड़ी बनाकर बसे 54 परिवारों को बेघर कर दिया है। वर्तमान में ये सभी सड़क किनारे जंगल में ही जीवन बिता रहे हैं।

लोगों की मांग है कि जिस बेरहमी से प्रशासन ने उनके आशियानों पर बुलडोजर चलाया है, उसके बाद प्रशासन को ही हमारी व्यवस्था करनी चाहिए। जगह नहीं दे सकते, तो कम से कम प्रशासन व्यवस्थापन ही करा दें। ज्ञात हो कि इन सभी 54 परिवार के लोगों ने वन विकास निगम कि सरकारी जगह पर झोपड़ी बनाकर अतिक्रमण कर लिया था, जिस पर प्रशासन ने बीते दिनों बुलडोजर चलवा दिया।

मोहल्ला एसडीएम सीपी बघेल ने बताया कि इन परिवारों को व्यवस्थापन देने का सवाल ही नहीं उठता। इनमें से कोई भी घर नहीं है। मोहला ब्लाक में ही सभी परिवारों का घर है। कार्रवाई के बाद सबको घर जाने की समझाइश भी दी गई है। अगर इसके बाद भी जंगल में रह रहे हैं, तो उन्हें समझाकर घर भेजा जाएगा।

गांव के मंच से भी भगाया

तोड़फोड़ की कार्रवाई के बाद 54 में से कुछ परिवार के लोग गांव में बने दुर्गा मंच पर ठहरे थे। इन्हें भी तीन दिनों बाद प्रशासनिक अफसरों ने धमकाकर भगा दिया। उनके परिवार आज भी सड़क किनारे ही ठिठुरती ठंड में जंगल के बीज रात और दिन गुजार रहे हैं। प्रभावित लोगों ने आरोप लगाया कि कब्जा छोड़ने के दौरान पुलिस ने जबरदस्ती लकड़ी चोरी का केस हम पर बनाया है, जो सरासर गलत है।

कलेक्टर से व्यवस्थापन की मांग

झोपड़ियां टूटने से बेघर हुए परिवार के लोगों ने शुक्रवार को जिला कार्यालय पहुंचकर कलेक्टर टीके वर्मा से व्यवस्थापन दिलाने की मांग की। कलेक्ट्रेट पहुंचे इमाल सोरी, रेखा बाई, धनेश्वरी, राजकुमारी, भुवन दास, अनिल कुमार और अशोक दास ने कहा कि बीते 10 साल से हम सभी झोपड़ी में रहकर रोजी मजदूरी कर रहे थे। हमारा आधार कार्ड भी यही का बना हुआ है। सालों बाद प्रशासन अतिक्रमण बताकर हम गरीब परिवारों के फिर से छत छीन ली। मजबूरन हमें खुले आसमान के नीचे जंगल पर ही रहना पड़ रहा है। कलेक्टर से गुहार लगाकर लोगों ने गांव में ही दिलाने की मांग की।

पुलिस ने पकड़ी है दो गाड़ी लकड़ी

गंभीर बात तो यह है कि अतिक्रमण की कार्रवाई के दौरान पुलिस ने इन तोड़े गए झोपड़ियों से लगभग दो गाड़ी लकड़ी जब्त की है। आरोप है कि झोपड़ियों में रह कर लोग वन भूमि की इमारती लकड़ियों को काटकर छिपा दिया था, जिसे वे बेचते भी थे। शिकायत पर ही लगातार कब्जा हटाने लोगों को नोटिस दिया जाता रहा।

तोड़फोड़ की कार्रवाई के एक दिन पहले भी प्रभावितों को नोटिस जी आ गया था। खुद से कब्जा नहीं हटाने के कारण प्रशासन ने झोपड़ियां तुड़वा दीं। बड़ी मात्रा में बरामद लकड़ियों के मामले में कुछ लोगों के खिलाफ पुलिस ने अपराध भी दर्ज किया है।

जानकारी ले लेता हूं

विधायक मोहला-मानपुर, इंदरशाह मंडावी ने बताया कि अतिक्रमण हटाने की जानकारी तो मिली थी। पर यह नहीं पता चला है कि लोग जंगल में रात गुजार रहे हैं। लोगों के घर होने की जानकारी भी प्रशासनिक स्तर से मिली है। मैं पूरी जानकारी लेता हूं। अगर सच में लोगों के घर-मकान नहीं होंगे, तो उनकी मदद की जाएगी।

एसडीएम मोहला सीपी बघेल ने कहा कि इस मामले में मोहला ब्लाक में ही सभी के घर हैं। इसके बाद भी लोगों ने सड़क किनारे वन भूमि पर अतिक्रमण किया था। घर-मकान नहीं होता, तो जरूर व्यवस्थापन देते। सभी को घर जाने की समझाइश दी गई है। कई परिवार घर लौट भी गए हैं, जो नहीं गए हैं उन्हें दोबारा समझाइश दी जाएगी।

Posted By: Shashank.bajpai

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