रायपुर। बिलासपुर लोकसभा चुनाव में एक ओर जहां भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष धरमलाल कौशिक और पूर्व मंत्री अमर अग्रवाल की प्रतिष्ठा दांव पर है, तो दूसरे ओर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की साख का सवाल है। 2018 के विधानसभा चुनाव में बिलासपुर लोकसभा की चार सीट पर भाजपा और दो-दो सीट पर कांग्रेस-जकांछ विधायक हैं।

लोकसभा चुनाव में जकांछ के मैदान में नहीं उतरने के बाद उनके मिले वोटों को अपने पाले में करने के लिए दोनों दलों ने ताकत झोंकी है। राजनीतिक प्रेक्षकों की मानें तो जोगी के वोट को जो उम्मीदवार अपने खाते में शिफ्ट कराने में सफल हो जाएगा, उसकी नैया पार हो जाएगी।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के करीबी माने जाने वाले कांग्रेस उम्मीदवार अटल श्रीवास्तव विधानसभा में टिकट की दौड़ में पिछड़ गये थे। अब अटल की जीत का जिम्मा भूपेश के कंधे पर है। यही कारण है कि यहां कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी की सभा भी कराई गई।

बिलासपुर एकमात्र लोकसभा सीट है, जिसमें चार विधायक भाजपा के हैं। ऐसे में वोटों के गणित के आधार पर भाजपा को उम्मीद भी है। इसके पीछे यह तर्क भी दिया जा रहा है कि पिछले लोकसभा में करीब दो लाख वोट से भाजपा की जीत हुई थी।

पीएम मोदी ने भी भाटापारा में सभा करके अस्र्ण साव के पक्ष में माहौल बनाने का प्रयास किया है। वहीं, बिलासपुर में वोटिंग की रफ्तार का ट्रेंड पिछले लोकसभा की तर्ज पर ही था। शुस्र्आती दो घंटे में करीब दस फीसद मतदान हुआ, जो पांच बजते-बजते 58 फीसद को पार कर गया। ऐसे में वोटरों के ट्रेंड के आधार पर कांग्रेस और भाजपा की उम्मीद बरकरार है।

समय बढ़ने के साथ बूथों पर होने लगी वोट का बारिश

लोकसभा चुनाव में बिलासपुर के शहरी इलाकों में मतदान की रफ्तार कमजोर नजर आई। सुबह नौ बजे तक बिलासपुर में सिर्फ तीन फीसद, मस्तूरी में सात फीसद मतदान हुआ था, जबकि मुंगेली में 14.8 और लोरमी में 15.6 फीसद मतदान हुआ।

अगले दो घंटे में मतदान में तेजी आई और बिलासपुर में 17 और मस्तुरी में 18 फीसद मतदान हो गया। जबकि बाकी विधानसभा में बराबर रफ्तार कायम थी। नौ बजे के बाद वोटर घर से बाहर आए और एक बजे तक औसत 41 फीसद वोटिंग हो गई। इसमें सबसे कम तखतपुर में 31 और बिलासपुर में 34 फीसद ही मतदान हुआ। आखिर समय में मतदाताओं ने जोर दिखाया और बूथ पर वोटों की बारिश शुरू हो गई।

पिछले लोकसभा की तर्ज पर वोटिंग, बिल्हा-बेलतरा में बढ़ा

इस लोकसभा चुनाव में भी वोटिंग का ट्रेंड पिछले लोकसभा की तर्ज पर रहा है। भाजपा विधायकों वाली बिल्हा, मुंगेली और बेलतरा विधानसभा में पांच से सात फीसद ज्यादा वोट बढ़े हैं, जबकि जकांछ विधायकों वाली कोटा और लोरमी में वोट प्रतिशत कम हुआ है। हालांकि अभी अंतिम आंकड़ा आना बाकी है।

आंकड़ों की मानें तो 2013 और 2018 के विधानसभा की तुलना में लोकसभा चुनाव में वोट प्रतिशत कम हुआ है। वोट शेयर के आधार पर यहां भाजपा की स्थिति मजबूत मानी जा रही है।

विधानसभा-2013 विस-2014 लोस-2018 विस-2019 लोस

कोटा- 77.37 - 68.10 - 75.06 - 63.00

लोरमी- 74.19 - 63.66 - 72.54 - 61.20

मुंगेली- 71.35 - 64.22 - 69.91 - 64.40

तखतपुर- 77.28 - 65.94 - 73.29 - 64.00

बिल्हा- 73.68 - 64.48 - 73.68 - 68.00

बिलासपुर- 61.60 - 57.02 - 61.60 - 59.00

बेलतरा- 68.06 - 62.22 - 68.06 - 64.11

मस्तूरी- 69.12 - 57.35 - 69.12 - 56.00

Posted By: Sandeep Chourey

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