रायपुर, नईदुनिया, राज्य ब्यूरो। छत्तीसगढ़ की राजनीति में वोटिंग ट्रेंड बदला हुआ है। एसोसिएशन फार डेमोक्रेटिक रिफार्म (एडीआर) की रिपोर्ट के अनुसार एक परिवार में अगर कोई उम्मीदवार पति या पत्नी को अपने विचारों से प्रभावित कर लेता है, तो चुनाव में 18 फीसदी वोट पा सकता है। दरअसल, चुनाव में 18 फीसदी वोटर पति या पत्नी के कहने पर वोट देते हैं, जबकि 58 फीसदी खुद तय करते हैं कि किसे वोट करना है। चुनाव में इन्हीं वोटरों को साधना राजनीतिक दलों के लिए सबसे बड़ी चुनौती है।

रिपोर्ट के अनुसार, दो फीसदी वोट दोस्तों के कहने पर शिफ्ट होते हैं, जबकि 21 फीसदी परिवार के अन्य सदस्यों के प्रभाव में वोट करते हैं। एडीआर की रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश के विधानसभा चुनाव में उम्मीदवार का चेहरा और पार्टी से ज्यादा आपस में बातचीत के आधार पर वोट हो रहा है। 59 फीसदी लोग यह मानते हैं कि वोट के लिए शराब और गिफ्ट बांटना गलत है। मतदाताओं में 18 फीसदी यह जानते हैं कि चुनाव के समय उम्मीदवार वोट को प्रभावित करने के लिए शराब और गिफ्ट बांटते हैं।

आपराधिक रिकार्ड वालों का यह है वोटिंग ट्रेंड

विधानसभा चुनाव में आपराधिक रिकार्ड वालों को वोट देने में 28 फीसदी लोगों का यह मानना है कि दबंग छवि का नेता बेहतर काम करता है। 16 फीसदी जाति को देखकर प्रभावित होते हैं। वोटिंग के दौरान मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार को देखकर वोट देने वालों की संख्या, उम्मीदवार के चेहरे को वोट देने वालों से अधिक है। सबसे कम लोगों ने स्वीकार किया कि वे जाति और गिफ्ट बांटने के आधार पर वोट करते हैं।

शहरी और ग्रामीण क्षेत्र में रोजगार बड़ा मुद्दा

शहरी और ग्रामीण क्षेत्र के वोटरों में रोजगार सबसे बड़ा मुद्दा है। ग्रामीण क्षेत्र के 58 और शहरी क्षेत्र के 61 फीसदी वोटर मानते हैं कि रोजगार चुनाव में सबसे बड़ा मुद्दा है। किसानों के लिये खाद-बीज के दाम, सस्ती बिजली, कृषि सब्सिडी और लोन मुद्दा है। शहरी क्षेत्र में अच्छी सड़क, बेहतर ट्रांसपोर्ट सिस्टम, स्वास्थ्य सुविधा और स्वच्छ पानी प्रमुख मुद्दा है।

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