रायपुर। Water Conservation: राजधानी में तालाबों पर अतिक्रमण करके वहां बड़ी-बड़ी इमारतें खड़ी कर दी गई हैं। राजधानी में तालाबों की स्थित बेहद नाजुक है। वहीं बारिश के पानी का संचय नहीं हो पा रहा है। बारिश का पानी भूमिगत न होकर नालों के माध्यम से सीधे नदी में जा रहा है।

बारिश का पानी सहेजने के लिए शासन-प्रशासन ने वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने का नियम तो बना दिया, लेकिन उसका कड़ाई से पालन नहीं कराया। कारण लोग अपने घरों में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम नहीं लगा रहे हैं और राजधानी का जल स्तर लगातार गिर रहा है। यदि राजधानी वासी बरसात की एक-एक बूंद को सहेजने के लिए जरूरी है रेन वाटर हार्वेस्टिंग और तालाबों का संरक्षण करना।

जानिए वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगवाने का क्या है नियम

शासन द्वारा बनाए गए नियमों के अनुसार 150 वर्ग मीटर यानी 1500 वर्ग फीट जमीन में होने वाले निर्माण के लिए रेन वाटर हार्वेस्टिंग अनिवार्य है। यह राज्य शासन का नियम है। भवन अनुज्ञा के समय निगम भू-मालिक से 50 रुपये प्रति वर्ग मीटर के हिसाब से राशि डिपॉजिट (एफडीआर) करवाई जाती है। वर्तमान में निगम के पास करोड़ों रुपये जमा हैं। रायपुर नगर निगम के आंकड़ों के मुताबिक सिर्फ पौने चार हजार भू-स्वामियों ने हार्वेस्टिंग करवाई है।

20 करोड़ लीटर पानी बरसात में बचा सकते हैं

अगर आप वाटर हार्वेस्टिंग करवाते हैं तो बरसात का एक लाख लीटर पानी तीन महीने में भूमिगत कर सकते हैं। इससे साल भर पानी की किल्लत नहीं होगी। रायपुर में 2.93 लाख घर हैं। अगर प्रति मकान का औसत क्षेत्रफल दो हजार स्क्वेयर फीट माना जाए तो 20 करोड़ लीटर पानी हम हर बरसात के सीजन में बचा सकते हैं। आंकड़े गवाह हैं कि शहर में पानी की खपत तेजी से बढ़ रही है। बीते वर्ष तक जहां रोजाना 200 एमएलडी पानी की आश्यकता थी, वह बढ़कर 230 एमएलडी तक जा पहुंची है। इसके अलावा 30 टैंकर रोजाना फेरे लगा रहे हैं।

विशेषज्ञों की राय

- नए पुराने सभी मकानों में वाटर हॉर्वेस्टिंग हो सकती है। बस करवाने की सोच होनी चाहिए, इसे समझना होगा। वाटर हार्वेस्टिंग के दो सिस्टम हैं, पहला- अगर घर के आसपास पांच-सात मीटर की दूरी पर बोर है तो वाटर हार्वेस्टिंग का पाइप इसमें जोड़ा सकता है। यह रिचार्ज होता रहेगा। दूसरा- अगर बोर नहीं है तो टेरिस (छत) के स्पेस के आधार पर गड्ढा खोदकर उसमें पाइप उतारे जा सकते हैं। 12-14 हजार रुपये खर्च आता है। जो मुझे नहीं लगता कि बहुत ज्यादा है

- विपिन दुबे, भू-जलविद एवं वाटर हार्वेस्टिंग विशेषज्ञ

- प्रदेश में मुख्यमंत्री की नरवा योजना से भी जल संरक्षण हो रहा है, क्योंकि नाले का पानी जो गति से निकल जाता था, अब वह धीरे-धीरे बह रहा है। इसके साथ ही जल संसाधन विभाग द्वारा बनाए गए स्टाप डैम से भी जल संचय हो रहा है। नाले के उद्गम से ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए जिससे पानी धीरे-धीरे बहे। इसके साथ ही शासन को राजधानी के प्रत्येक घर में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम अनिवार्य रूप से लगाना चाहिए।

-हेमराज कुटारे, सेवा निवृत्त (प्रमुख अभियंता जल संसाधन विभाग छग)

जल की खपत कम करना चाहिए क्योंकि पानी कम है। राजधानी के तालाबों को यदि बेहतर कर देंगे तो राजधानी में जल संकट जैसी स्थिति नहीं रहेगी। तालाब बेहतर हो जाएंगे तो लोग उसमें नहाएंगे, कपड़ा घुलने का काम करेंगे। लेकिन वर्तमान में सारे तालाब गंदे हैं। तालाबों का पानी पीना तो दूर की बात कोई नहाता नहीं है। राजधानी वासी तालाबों का पानी गाड़ी धोने के उपयोग में ला रहे हैं। तालाबों को बेहतर करने से लोग तालाब में नहाएंगे। उसके बाद धीरे-धीरे पानी की संचय शुरु हो जाएगा। इसके साथ ही वर्तमान में भी लोगों को पानी की उपयोग कम करना चाहिए।

-डॉ. दुर्गा पद कोइति, विशेषज्ञ

Posted By: Azmat Ali

नईदुनिया ई-पेपर पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे

नईदुनिया ई-पेपर पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे

डाउनलोड करें नईदुनिया ऐप | पाएं मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और देश-दुनिया की सभी खबरों के साथ नईदुनिया ई-पेपर,राशिफल और कई फायदेमंद सर्विसेस

डाउनलोड करें नईदुनिया ऐप | पाएं मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और देश-दुनिया की सभी खबरों के साथ नईदुनिया ई-पेपर,राशिफल और कई फायदेमंद सर्विसेस

 
Show More Tags