रायपुर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। एयरपोर्ट के ठीक सामने जैनम मानस भवन परिसर में बने 20 हजार वर्गफीट से ज्यादा विशाल पंडाल में हजाराें श्रद्धालुओं की नजरें मंच पर टिकीं थीं। मुख्य पीठिका पर मुनि जिन पीयूष सागर महाराज एवं मुनि रत्न सागर महाराज विराजे थे। मंच के दांयी ओर साध्वी सुभद्राश्रीजी, साध्वी मनोरंजना श्रीजी, बस्तर प्रहरी साध्वी राजेश, साध्वी शुभंकरा समेत 20 से अधिक साध्वी मंडल विराजित थे, वहीं मंच के बांयी ओर दीक्षा लेने जा रही मुमुक्षु बहनों के माता-पिता, भाई-बहन एवं स्वजन भक्तिभाव में डूबे थे।

विधिवत मंत्रोच्चार के साथ दो युवतियों एवं एक महिला को दीक्षा देने की परंपरा निभाई जा रही थी। अपनी बेटियों को सांसारिक जीवन से साधु जीवन में प्रवेश करते देखकर माता-पिता भावुक हो गए। वे अपने आंसू नहीं रोक पाए।

केश लोचन के बाद मंच पर पहुंची मुमुक्षु

दोपहर 12 बजे के करीब मुमुक्षुओं का केश लोचन करने के बाद गाजे-बाजे के साथ नृत्य करते हुए स्वजन उन्हें लेकर मंच पर पहुंचे। जैनम मानस भवन से मुख्य मंत्र तक मुमुक्षुओं पर अक्षत की वर्षा कर स्वागत किया गया। तीन घंटे से अधिक समय तक दीक्षा की अनेक रस्में भक्तिभाव भरे गीतों के साथ संपन्न हुई।

जन्म नाम को त्यागा, मिला नया नाम

मंच पर आकाश से उड़ते हुए पुष्पक विमान को दर्शाया गया। इस विमान के भीतर तीन सुनहरे पत्र रखे हुए थे। स्वजनों ने विमान से उन पत्रों को निकालकर मुनि पीयूष सागर महाराज को समर्पित किया। उन पत्रों में तीनों मुमुक्षुओं के साधु जीवन में प्रवेश करने पर पुकारे जाने वाले नए नाम अंकित थे। मुनिश्री ने जब नए नाम की घोषणा की तो मुमुक्षुओं के स्वजन खुशी के मारे मंच पर ही नृत्य करने लगे। मुमुक्षुओं ने हाथों में रजोहरण थामकर भक्तिभाव से नृत्य किया। खुशी भरे माहौल में भी सैकड़ों लोगों की आंखें छलक पड़ी।

भरत चक्रवर्ती भोजन शाला में हजारों ने ली प्रसादी

17 हजार से अधिक वर्गफीट में भरत चक्रवर्ती नाम से निर्मित भोजन शाला में हजारों श्रद्धालुओं ने भोजन प्रसादी ग्रहण की। एक बार में ढाई हजार से अधिक श्रद्धालुओं के भोजन करने की क्षमता थी। सूर्यास्त से पहले तक प्रसादी ग्रहण करने लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा।

भजनों से बांधा समां

विधिकारक राजेश तातेड़ अहमदाबाद, विमल गोलेच्छा रायपुर ने दीक्षा विधि संपन्न कराई। भजन गायक वैभव दोषी, अनिल राठौर, दिलीप बाफना मुंबई ने भक्तिभाव वाले गीतों से समां बांधा।

आज प्रतिष्ठा महोत्सव

श्रीजैनम मानस समिति एवं प्राण प्रतिष्ठा समारोह समिति के जयकुमार बैद एवं प्रवक्ता संतोष बैद, तरूण कोचर ने बताया कि भगवान धर्मनाथ एवं अन्य जिनेश्वर परमात्मा की प्रतिमाओं की प्राण प्रतिष्ठा 9 दिसंबर को की जाएगी। प्राण प्रतिष्ठा के पश्चात 10 दिसंबर को मुख्य गर्भगृह का द्वार उद्घाटन होगा। श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ मंदिर खुल जाएगा।

Posted By: Shashank.bajpai

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