रायपुर। Raipur News : दुर्ग जिले के 3000 एकड़ में किसानों द्वारा कपास की खेती की जा रही है। कपास से रुई बनाने के लिए तीन फैक्ट्रियां भी लगाई जा चुकी है। यहां बनने वाली रुई की मांग गुजरात, राजस्थान, पश्चिम बंगाल सहित बांग्लादेश और चीन तक है। किसान 15 से 17 हजार रुपये प्रति एकड़ तक खर्च कर रहे हैं। इसके बाद 50 हजार रुपये तक कपास बेच रहे हैं। किसान इससे हो रही अच्छी आमदनी को देखते हुए कपास की फसल आगे भी लेने की तैयारी में जुटे हुए हैं।

दुर्ग जिले के गोड़ी, लहंगा, पोहड़िया, पहारा, अछोटी, नंदिनी ,ढौर, परसदा सहित धमधा क्षेत्र के विभिन्न गांव में इस समय किसान कपास की खेती कर रहे हैं। जुलाई में खेतों में किसान बीज डालते हैं और एक पौधे से दो बार कपास की फसल लेते हैं। अक्टूबर-नवंबर दिसंबर और जनवरी तक कपास की पैदावार होती है। किसान 400 ग्राम बीज के लिए आठ सौ रुपये खर्च करते हैं और एक एकड़ खेत में 700 ग्राम बीज डालते हैं।

तीन से चार गुना अधिक पैदावार होने लगी है

दुर्ग जिले में परंपरागत खेती के तहत किसानों द्वारा केवल धान की फसल ही ली जाती थी। कपास की फसल से हो रहे लाभ को देखते हुए किसान पिछले पांच सालों में तीन से चार गुना अधिक कपास का उत्पादन लेने लगे हैं। कपास होने के बाद इसे तोड़ने के लिए राजस्थान से मजदूरों को बुलवाया जाता है।

ग्रामीणों को मिल रहा रोजगार

जिले में कपास की अच्छी पैदावार को देखते हुए तीन फैक्ट्रियां भी लग गई है। अछोटी, निमाही भाठा और बेरला में लगी फैक्ट्रियों में कपास से रुई बनाने का कार्य किया जा रहा है। इसकी वजह से स्थानीय है ग्रामीणों को इन फैक्ट्रियों में रोजगार भी मिल रहा है।

Posted By: Shashank.bajpai

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