सतीश पांडेय, रायपुुर। Raipur Column Shaharnama: रायपुर नगर निगम में सामान्य सभा की बैठक कराने भाजपा पार्षद दल एक बार फिर से सत्तापक्ष के खिलाफ लामबंद होता नजर आ रहा है। दरअसल, जुलाई महीने में संपन्ना सामान्य सभा में वार्डों के विकास कार्यों की दयनीय हालत को लेकर विपक्ष चर्चा करना चाह रहा था लेकिन गोलबाजार की दुकानों के मालिकाना हक समेत अन्य कई मुद्दे के बीच वार्ड विकास का मुद्दा दबकर रह गया।

सामान्य सभा को करीब तीन महीने होने को है, ऐसे में भाजपा पार्षद अभी से दबाव बनाने में लगे हैं। नेता प्रतिपक्ष मीनल चौबे रायपुर के 70 वार्डों में विकास की हालत को काफी दयनीय बताते हुए समस्याओं को लेकर अलग से चर्चा करने सामान्य सभा बुलाने पर जोर दे रही है। मगर, सत्तापक्ष की तरफ से सामान्य सभा की कोई तिथि घोषित नहीं की गई। निगम में इस बात की चर्चा होने लगी है कि आखिर सामान्य सभा से परहेज क्यों?

पैसा दबाकर गायब होने का चलन

कर्ज में लाखों रुपये लेकर उसे दबा लेने का चलन राजधानी में तेजी से बढ़ता जा रहा है। इस खेल में बड़े रसूखदार और पैसे वाले लोगों के किस्से आए दिन सामने आते रहे हैं। कुछ साल पहले दवा कारोबारी, जूता दुकानदार और लोहा कारोबारी ने शहर से करोड़ों रुपये का कर्ज लिया। जब पैसे लौटाने का समय आया तो सभी अचानक शहर से गायब हो गए। बाद में जब मामला शांत हुआ तब अचानक प्रगट होकर खुद को दिवालिया बताने लगे।

ऐसे कई मामले पुलिस थाने से होकर कोर्ट तक पहुंच चुके हैं। ताजा मामला खरोरा इलाके से लापता रसूखदार भाजपा नेता का सामने आया है। चर्चा है कि सिर पर कर्जे का बोझ बढ़ने से परेशान होकर नेताजी अचानक लापता हो गए हैं। काफी खोजबीन के बाद स्वजन ने उनकी गुमशुदगी की रपट पुलिस में लिखाई है। अब देखना यह है कि नेताजी की वापसी कब होती है।

कांफ्रेंस से पहले धड़कनें तेज

21 और 22 अक्टूबर को होने जा रहे कलेक्टर और आइजी-एसपी कांफ्रंेस से पहले आइएएस-आइपीएस की धड़कनें तेज हो गई हैं। दरअसल, मुख्यमंत्री भूपेश बघेल पहले कलेक्टरों की क्लास लेंगे, फिर आइजी-एसपी के कामकाज का आकलन करेंगे। परफार्मेंस के आधार पर ही इन सभी को जिले और रेंज में बने रहना है या नहीं, यह तय होगा। लिहाजा जैसे-जैसे कांफ्रेंस के दिन नजदीक आते जा रहे हैं, अफसरों की नींद उड़ी हुई है।

मंत्रालय में यह चर्चा है कि रायपुर, सरगुजा और बस्तर रेंज के कई जिलों के कलेक्टर और कप्तानों का परफार्मेंस ठीक नहीं होने का फीडबैक सरकार को मिला है। योजनाओं का क्रियान्वयन सही तरीके से नहीं होने और बिगड़ रही कानून व्यवस्था का खामियाजा आगामी विधानसभा चुनाव में उठाना पड़ सकता है। अब समय भी नहीं बचा है कि अफसरों को परफार्मेंस सुधारने का मौका दिया जा सके। लिहाजा ऐसे अफसरों की जिले से छुट्टी तय है।

नेताजी की पकड़ से जल-भुन गए कांग्रेसी

नगर निगम के उपनेता प्रतिपक्ष मनोज वर्मा का विवादों से गहरा नाता रहा है। पहले मीडियाकर्मियों को धमकाने से चर्चा में आए और अब एक स्कूली बच्चे की डंडे से पिटाई करने के मामले में बुरे फंस गए हैं। नेताजी ने न केवल बच्चे को पीटा बल्कि उसके स्वजनों को फोन पर जमकर धमकाया भी। इंटरनेट मीडिया में इस घटना का आडियो वायरल होने पर कांग्रेसियों ने मोर्चा खोल दिया। उन्होंने पुलिस कप्तान से मिलकर बच्चे का डाक्टरी मुलाहिजा करवाने के साथ ही पीड़ित परिवार को सुरक्षा देने की भी मांग कर दी।

कप्तान के निर्देश पर आखिरकार थानेदार को नेताजी के खिलाफ केस दर्ज करना पड़ गया। नेताजी भी कम चालाक नहीं हैं। उन्होंने भी आनन-फानन में दशहरा उत्सव में दाऊजी (मुख्यमंत्री भूपेश बघेल) को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित कर जल-भुन रहे कांग्रेसी पार्षदों को अपनी पकड़ दिखा दी। अब कांग्रेसी नेता चुप्पी साधकर बैठ गए हैं।

Posted By: Shashank.bajpai

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