रायपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

प्रदेश में वन्यजीवों की देखभाल भगवान भरोसे हो गई है, क्योंकि शासन ने दो डॉक्टरों की प्रतिनियुक्ति समाप्त कर उनको मूल विभाग में वापस भेज दिया है। वन विभाग के पास अब सिर्फ एक जानकार डॉक्टर हैं। विभाग ने हाल ही में संविदा पर 13 नए डॉक्टरों की भर्ती की है, लेकिन अभी तक उनको ट्रेनिंग नहीं दी गई है। बिना ट्रेनिंग के इन डॉक्टरों से फील्ड में काम कराना टेढ़ी खीर साबित होगी। विभाग के अधिकारियों का कहना है कि नए डॉक्टरों से प्रदेश भर के वन्य प्राणियों की देखभाल कराना काफी मुश्किलों भरा होगा।

ज्ञात हो कि प्रदेश में जंगल सफारी, नंदनवन, कानन पेंडारी, बारनवापारा, भोरमदेव, उदंती सीता नदी टाइगर रिजर्व, कांगेर घाटी आदि जगहों पर वन्य प्राणियों की देखभाल का जिम्मा महज तीन डॉक्टरों के कंधों पर था। डॉ. जेआर जड़िया कानन पेंडारी में पदस्थ थे। उन्हें बिलासपुर और अंबिकापुर सर्लिक देखना पड़ता था। जंगल सफारी में पदस्थ पवन कुमार टंडन को दुर्ग, जगदलपुर और रायपुर सर्किल तथा डॉ. आरके वर्मा को नंदनवन में वन्य प्राणियों की देखभाल की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। अब वरिष्ठ डॉक्टरों में सिर्फ डॉ. आरके वर्मा ही बचे हैं। ऐसे में वन्यजीवों की देखभाल करना आसान नहीं है।

2007 में हुई थी दोनों डॉक्टरों की प्रतिनियुक्ति

वन विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक डॉ. जेआर जड़िया और डॉ. पवन कुमार टंडन मूल रूप से पशुधन विभाग के डॉक्टर हैं। दोनों डॉक्टरों की काबिलियत को देखते हुए वर्ष 2007 में वन्य प्राणी चिकित्सा अधिकारी के रूप में प्रतिनियुक्ति दी गई थी। दोनों डॉक्टरों ने करीब 12 साल तक वन्य प्राणियों की बेहतर देखभाल की, लेकिन शासन ने दोनों डॉक्टरों की प्रतिनियुक्ति बुधवार को खत्म कर उनको उनके मूल विभाग में वापस भेज दिया।

वर्जन

दोनों पशु चिकित्सकों की प्रतिनियुक्ति समाप्त कर उनको उनके मूल विभाग में भेज दिया गया है। वन्यजीवों की देखभाल के लिए 13 नए डॉक्टरों की भर्ती की गई है।- अतुल कुमार शुक्ला, पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ

Posted By: Nai Dunia News Network