रायपुर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। हिंदू संवत्सर के अघहन माह की नवमी तिथि पर रविवार को नारी शक्ति की प्रतीक रानी सती दादी का जन्मोत्सव श्रद्धा उल्लास से मनाया गया। राजा तालाब स्थित मंदिर में सुबह परिवार की सुख-समृद्धि और संतान प्राप्ति की मन्नात मांगकर महिलाओं ने जात धोक पूजा की। दोपहर को 500 से अधिक महिलाओं ने एक सरीखी चुंदड़ी वाली साड़ी धारणकर मंगल पाठ किया। महिलाओं ने एक स्वर में मंगल पाठ किया। पाठ के दौरान ऐसा भक्तिभाव जागा कि महिलाएं झूम उठीं।

मंदिर समिति के अध्यक्ष किशोर ड्रोलिया ने बताया कि अग्रवाल समाज के कई परिवारों में रानी सती दादी को कुल देवी के रूप में पूजा जाता है। हर साल अगहन नवमीं को जन्मोत्सव मनाया जाता है, इसे मिंगसर नवमी भी कहते हैं। मंदिर समिति के सचिव पवन झुंझनुवाला एवं प्रचार प्रसार प्रभारी कैलाश अग्रवाल ने बताया कि दो दिवसीय उत्सव के पहले दिन शनिवार को जोत प्रज्वलन के साथ शुभारंभ हुआ था। 56 भोग अर्पित करके महाआरती के पश्चात प्रसाद वितरित किया गया और रात भर जागरण में भजन-कीर्तन में श्रद्धालु रमे रहे।

दूसरे दिन सुबह रविवार को सुबह विशेष पूजा-आरती करके जन्मोत्सव मनाया गया। श्रद्धालुओं ने एक-दूसरे को बधाई देकर जात-धोक पूजा की। साथ ही दादीजी को सवामणि का भोग अर्पित किया। दोपहर बाद दादीजी का गुणगान करने के लिए मंगल पाठ किया गया। महिलाएं एक सरीखी लाल, पीली चुंदड़ी साड़ी और पुरुष सफेद पायजामा-कुर्ता धारण कर मंगलपाठ, महाआरती में शामिल हुए। मंगलपाठ में जन्मोत्सव, बधाई, मेहंदी, गजरा मुकलावा आदि रस्म निभाते हुए जन्मोत्सव मनाया गया।

मंगलपाठ का उद्देश्य भावी पीढ़ी को रीति-रिवाजों, संस्कृति की जानकारी देना और आपसी भाईचारे को बढ़ाना था। जन्मोत्सव आयोजन में राजधानी के अलावा दुर्ग, राजनांदगांव, भिलाई, बिलासपुर, महासमुंद, धमतरी, खैरागढ़, बालोद आदि शहरों से भी श्रद्धालु पहुंचे और जात धोक पूजा की रस्म निभाई।

Posted By: Ravindra Thengdi

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