आकाश शुक्ला। रायपुर। World Anti Drug Day Today: राज्य के किशोर और युवा नशे की गिरफ्त में आते जा रहे हैं। स्थिति यह है कि राज्य में 15 वर्ष से अधिक आयु के 43.1 प्रतिशत पुरुष वर्ग को तंबाकू और 34.8 प्रतिशत शराब की लत है।

नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (एनएफएचएस -5) के अनुसार महिलाओं की स्थिति भी कुछ ऐसी ही है। राज्य में 15 वर्ष से अधिक आयु के महिला वर्ग में 17.3 प्रतिशत तंबाकू व पांच प्रतिशत से अधिक शराब के आदी हैं। राज्य सरकार नशा मुक्ति की बात करती है। इसके लिए हर साल लाखों रुपये बजट में खर्च भी होता है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग की लचर व्यवस्था के चलते नशा छुड़ाने व जागरूकता अभियान ठंडे बस्ते में है। इधर राज्य में संचालित कई नशामुक्ति केंद्र बंद हो चुके हैं तो कुछ सिर्फ नाम के ही रह गए हैं।

नशे की लत से बढ़ रहे मानसिक रोगी

चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार नशे की लत की वजह से मानसिक रोगियों की संख्या बढ़ रही है। बता दें राज्य में 22 प्रतिशत से अधिक लोग किसी न किसी तरह की मानसिक समस्याओं से ग्रस्त हैं यानी हर पांचवां व्यक्ति। मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत स्वास्थ्य केंद्रों में काउंसिलिंग व इलाज की व्यवस्था की जानी है। इसके लिए 2,100 से अधिक मेडिकल आफिसर व रूरल मेडिकल असिस्टेंट को प्रशिक्षण दिया जा चुका है, लेकिन दवाओं की किल्लत व स्वास्थ्य विभाग की उदासीनता के चलते तीन साल से योजना शुरू ही नहीं हो पाई है।

ढाई वर्षों में सिर्फ 150 को काउंसिलिंग

संगी मितान सेवा संस्थान नशा मुक्ति केंद्र की प्रमुख ममता शर्मा ने बताया कि किसी भी प्रकार का नशा करने वाले लोगों के लिए नशा सेवन की आदत को छोड़ना नामुमकिन नहीं है। अगर व्यक्ति सोच ले तो कुछ भी कर सकता है। वर्ष 2019 से 15 जून 2022 तक संस्थान ने 150 लोगों को काउंसिलिंग की है। वहीं नशामुक्ति केंद्र में 250 लोगों ने नशा का सेवन छोड़ने का संकल्प लिया है।

डा. भीमराव आंबेडकर अस्पताल की मनोचिकित्सक डा. अल्का चंद्राकर ने कहा, बाजारों में आसानी से उपलब्ध होने की वजह से युवाओं में नशे की लत बढ़ती जा रही है। जागरूकता की कमी भी एक बड़ी वजह है। मनोचिकित्सा विभाग की ओपीडी में आने वाले 40 प्रतिशत से अधिक रोगी किसी तरह से नशे के आदी होते हैं। इसके खिलाफ जागरूकता व विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाएं बढ़ाना जरूरी है।

Posted By: Ashish Kumar Gupta

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