रायपुर। रेडियो का वक्त के साथ स्वरूप बदला हैं। पहले रेडियो को एक जगह पर पूरे परिवार के साथ लोग सुनते थे। अब इस भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग समय के अभाव में आधुनिकता के युग में स्मार्ट फोन से रेडियो सुनना पसंद करते हैं। इसके अलावा राजधानी में कई ऐसे रेडियो प्रेमी है जो रेडियो पर अपना नाम सुनने को बेताब रहते हैं। तो कई ऐसे श्रोता हैं, जो 500 से अधिक रेडियो को सहेजकर घर में रखें हैं। आज 13 फरवरी को विश्व रेडियो दिवस है।

उल्लेखनीय है कि विश्व रेडियो दिवस मनाने के कारण यह है कि संयुक्त राष्ट्र की रेडियो यूएनओ की वर्षगांठ भी होती है। क्योंकि 1946 में इसी दिन वहां रेडियो स्टेशन स्थापित हुआ था। और पहली बार 13 फरवरी 2012 को यह विश्व रेडियो दिवस पूरी दुनिया में उमंग-उत्साह के मनाया जाता है।

रोजना लिखते हैं 30 से अधिक पत्र

कुम्हारी (आरंग) के रहने वाले मास्टर मोहन लाल देवांगन बताते हैं आठ वर्ष के थे तब रेडियो सुन रहे हैं। वे रेडियो रोजाना 17 घंटे सुनते हैं। इसके अलावा रेडियो को अपना नाम सुनने के लिए रोजाना 30 से अधिक पोस्टकार्ड या मोबाइल द्वारा मनपसंद गीत भेजना इसका दिनचर्चा में शामिल हैं। उन्होंने बताया कि 1983 में आपके मीत ये गीत कार्यक्रम में पहली बार उनका पत्र कार्यक्रम में शामिल किया था। जो अब उन्होंने तकरीबन पांच लाख से अधिक पत्र लिख चुके हैं।

फरमाइशी गाना सुनना बेहद पसंद

शहर के मौदहापारा के रहने वाले रतन जैन (64) बताते हैं कि बचपन से रेडियो सुन रहे हैं। रेडियो सुनने का लात परिवारों से पड़ा हैं। तब घर वाले ने किसी व्यक्ति का रेडियो पर नाम सुनते थे तब कहते हैं कि अपना परिवार पर किसी एक व्यक्ति का नाम रेडियो में आना चाहिए। फिर क्या हुआ कि रेडियो में नाम सुनने के लिए पत्र लिखना शुरू कर दिया। जो पत्र को ज्यादातरः हिंदी गाने सुनने के लिए पत्र लिखते हैं।

डेढ़ लाख लिख चुके हैं पत्र

छत्तीसगढ़ रेडियो श्रोता संघ के अध्यक्ष परसराम साहू आज रेडियो से अपने सुनने के लिए डेढ़ लाख से अधिक पत्र लिख चुके हैं। परसराम बताते हैं कि रेडियो सुनाना यह दिनचर्चा में शामिल हैं। आज रोजाना पांच से अधिक घंटे रेडियो सुनाते हैं। लोगों के स्मार्ट फोन से युवा चलते-फिरते रेडियो सुन रहे हैं। पहले रेडियो सिर्फ सूचना और मनोरंजन के लिए सुनाना पसंद करते थे, लेकिन अब रेडियो कार्मेशियल भी हो चुका हैं।

वाल रेडियो सेट से किया संग्रहण करने का कार्य

प्रोफेसर कॉलोनी के रहने वाले मनोहर डेंगवानी का एक ऐसा जुजून हैं कि आज 1940 से लेकर कुल 550 से रेडियो का कनेक्शन मौजूद हैं। आज इन रेडियो को अपने घर के एक कमरे में संजोकर रखा हैं। मनोहर बताते हैं कि रेडियो सुनाना दादा जी को बहुत पसंद थे, फिर पिता जी का रेडियो के प्रति लगाव बढ़ा। फिर इन सबको को देखते हुए रेडियो को सहेजने का कार्य शुरू कर दिया। सबसे पहले वाल रेडियो सेट से शुरू की। बता दें कि 550 रेडियो पर अभी चालू की हालत हैं।

Posted By: Nai Dunia News Network

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