रायपुर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। विश्व मृदा दिवस के मौके पर कृषक संगोष्ठी में इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डा. एसएस सेंगर ने कहा कि मिट्टी जीवन का आधार है। मिट्टी फसलों को पोषण और आधार-प्रदान करती है। यदि मिट्टी स्वस्थ्य रहेगी तो फसलें स्वस्थ होंगी और मानव भी स्वस्थ्य रहेगा।

उन्होंने कहा कि मिट्टी के बनने में हजारों-लाखों वर्ष का समय लगता है, मिट्टी को कारखानों में तैयार नहीं किया जा सकता। मिट्टी का संरक्षण एवं संवर्धन किया जाना आवश्यक है। उन्होंने किसानों से मिट्टी की सेहत की देखभाल करने का आह्वान किया। इस संगोष्ठी का आयोजन इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के मृदा विज्ञान विभाग, निदेशालय विस्तार सेवाएं, कृषि विज्ञान केंद्र रायपुर और कृषि एवं जैव प्रौद्योगिकी विभाग छत्तीसगढ़ शासन द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। उल्लेखनीय है कि मृदा स्वास्थ्य के प्रति जन-जागरूकता उत्पन्ना करने के लिए संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा प्रतिवर्ष पांच दिसंबर को विश्व मृदा दिवस मनाया जाता है।

उर्वरकों का संतुलित उपयोग करने की जरूरत

संगोष्ठी की अध्यक्षता कृषि एवं जैव प्रौद्योगिकी विभाग के संयुक्त सचिव केसी पैकरा ने कहा कि मिट्टी की सेहत को बनाए रखने के लिए खाद एवं उर्वरकों का संतुलित उपयोग किया जाना चाहिए। रासायनिक ऊर्वरकों एवं कीटनाशकों के अंधाधुंध उपयोग से मिट्टी पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभाव के कारण अब किसान फिर से जैविक खेती की ओर उन्मुख हो रहें हैं। उन्होंने कहा कि जैविक खेती से फसलों का स्वास्थ्य अच्छा होता, उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है, कीड़े एवं बीमारियां कम लगती हैं और फसल की गुणवत्ता अच्छी होती है। उन्होंने कहा कि दलहन फसलें लेने से मिट्टी की सेहत सुधरती है। पैकरा ने कहा कि मिट्टी में जब 45 प्रतिशत ठोस पदार्थ, 5 प्रतिशत जीवांश, 25 प्रतिशत पानी और 25 प्रतिशत वायु हो तब उसे स्वस्थ माना जाता है।

Posted By: Shashank.bajpai

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