रायपुर। Raipur Local Edit: किसी मांग के समर्थन में पदयात्रा बुरी बात नहीं है। प्रदर्शन के इस तरीके से किसी को परेशानी भी नहीं हो सकती। लोकतांत्रिक व्यवस्था में विरोध का स्वागत किया जाना चाहिए। सभी को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है। शांतिपूर्ण विरोध सरकार को सचेत करता है। लेकिन साथ ही इस बात का भी चिंतन किया जाना चाहिए विरोध से किस लक्ष्य को प्राप्त किया जाएगा।

आम लोगों को मुख्यधारा से अलग करने वाली विचारधारा को लोकतांत्रिक माना जाना कहां तक उचित होगा। इस बात पर मनन करना होगा कि शांतिमय तरीके से विरोध की आड़ में देश-प्रदेश की छवि खराब करने की कोशिश तो नहीं हो रही। उत्तर में सरगुजा से और दक्षिण में बस्तर से आदिवासी समाज के लोग पदयात्रा करते हुए राजधानी पहुंचे हैं।

सरगुजा संभाग के हसदेव अरण्य क्षेत्र में कोल ब्लाक आवंटन के खिलाफ आदिवासी 300 किलोमीटर पैदल चलकर राजधानी पहुंचे हैं तो बस्तर से आदिवासी समाज वहां ग्राम पंचायत की जगह नगर पंचायत बनाने का विरोध करते हुए पदयात्रा कर राजधानी पहुंचा है। हसदेव अरण्य क्षेत्र में कोल ब्लाक आवंटन का विरोध कर रहे आदिवासी हसदेव बचाओ समिति के बैनर तले सरगुजा से पैदल चलकर आए हैं।

उनकी मांग है कि तीन कोल ब्लाकों का आवंटन नहीं किया जाए। इससे 10 हजार आदिवासी प्रभावित होंगे और खनन से वन संपदा भी प्रभावित होगी। ये पदयात्री महात्मा गांधी की फोटो लेकर चल रहे थे। वहीं, बस्तर से निकले आदिवासी ग्राम पंचायत को नगर पंचायत बनाने के खिलाफपदयात्रा करके रायपुर कूच कर चुके हैं। वे भी राज्यपाल को ज्ञापन सौंपना चाहते हैं। यहां विचारणीय है कि कोल ब्लाक आवंटन और नगर पंचायत के विरोध से संबंधित मांगें क्या उस क्षेत्र के लोगों के ही विकास के मार्ग को अवरुद्ध नहीं करती हैं।

इसी तरह बस्तर के आदिवासियों की मांग भी विचित्र है। आज सभी विकास चाहते हैं, मगर यहां पिछड़ापन मांगा जा रहा है। ग्राम पंचायत को नगर पंचायत बनाने पर सुविधाएं बढ़ेंगी और क्षेत्र के विकास की प्रक्रिया भी होगा। विचारणीय है कि कहीं विकास विरोधी विचारधारा हावी तो नहीं हो रही। आदिवासियों को ढाल बनाकर विकास का मार्ग अवरुद्ध करने वाले किनके इशारे पर काम कर रहे हैं। आदिवासियों का नेतृत्व करने वालों को पूरे मामले में आत्ममंथन करना चाहिए।

सुनिश्चित तो यह कराया जाना चाहिए कि उक्त क्षेत्र के लोगों को उच्च गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और चिकित्सा व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए तथा रोजगार के अवसर सृजित हों ताकि आने वाली पीढ़ी स्वयं अपने क्षेत्र के विकास की रणनीति बना सके। उम्मीद की जानी चाहिए सरकार इस दिशा में ठोस पहल करेगी और संवाद से समस्या का सार्थक समाधान निकलेगा।

Posted By: Shashank.bajpai

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