रायपुर, Inspirational News। इन दिनों नक्सल प्रभावित सुकमा जिले के कलेक्टर विनित नंदनवार की तस्वीरें सोशल मीडिया में छाई हुई हैं। जिले के युवा कलेक्टर की तस्वीरों से प्रेरणा ले रहे हैं। सिक्स पैक एब्स और परफेक्ट बाडी की तस्वीरें जिले के वाट्सएप और अन्य सोशल मीडिया में वायरल हो रही हैं। कुछ ही दिन पहले सुकमा में पदस्थ कलेक्टर आईएएस विनित नंदनवार की बिना शर्ट के खिंचवाईं गई तस्वीरें सोशल मीडिया में वायरल हो रही हैं। दरअसल, कलेक्टर विनित नंदनवार अपने स्वास्थ्य और स्वस्थ्य जीवनशैली को लेकर काफी गंभीर हैं। लिहाजा उन्होंने सरकारी काम के बाद बचे समय का सदुपयोग वह अपनी स्वस्थ जीवनशैली को बनाए रखने के लिए लगाते हैं। वह कहते हैं कि व्यस्तता हमेशा रहती है, लेकिन इतनी भी नहीं कि दिन में एक घंटा आप अपने लिए भी नहीं निकाल सकें।

यह उनकी मेहनत का ही प्रतिफल है कि उनकी तस्वीरें आज-कल सुकमा ही नहीं देशभर में सोशल मीडिया के जरिये जमकर वायरल हो रही हैं। उन्होंने बताया कि अगस्त में वह काम के दौरान कोविड संक्रमित भी हो गए थे। इसके बाद एम्स में उनका इलाज हुआ और बीमारी से ठीक होने के बाद वापस पुरानी जैसी काया हासिल करने के लिए उन्होंने काफी मेहनत की। युवाओं का मानना है कि अनुशासित और मूल्य आधारित जीवन शैली का परिणाम है यह तस्वीर। ज्ञात हो कि रायपुर के एडीएम रहते हुए उन्होंने कोविड संक्रमण को फैलने से रोकने के क्षेत्र में बेहतर काम किया था।

युवाओं को यह सलाह

सुकमा के कलेक्टर विनीत नंदनवार ने युवाओं को सलाह दी है कि वे उनकी देह को देखकर प्रेरणा लें। मगर, ऐसी काया बनाने के लिए किसी तरह के पाउडर या एस्टेरायड का सहारा नहीं लें। वह बताते हैं कि मैंने तीन से चार साल की कड़ी मेहनत के बाद अपने शरीर को इस तरह का बनाया है। मैं सिर्फ प्राकृतिक आहार ही लेता हूं और किसी भी तरह के पाउडर का सेवन नहीं करता हूं। आप भी जल्दी बाडी बनाने के चक्कर में किसी तरह की गलत चीजों का सहारा नहीं लें। वह बताते हैं कि मैं अपने डाइट चार्ट को मेंटेन रखता हूं। जंक फूड और तली-भुनी चीजें नहीं खाता हूं। एक मिनट के स्वाद के लिए अपने स्वास्थ्य से समझौता नहीं करना चाहिए।

साल 2013 बैच के हैं आईएएस

विनीत नंदनवार साल 2013 बैच के आईएएस अधिकारी हैं। नवंबर में सुकमा में तबादला होने से पहले वह करीब डेढ़ साल तक एडीएम रायपुर रहे हैं। इससे पहले वह गारियाबंद और धमतरी के जिला पंचायत सीईओ के पद पर भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं। उन्होंने बताया कि मेरा जन्म और लालन-पालन बस्तर-जगदलपुर में ही हुआ। बस्तर हाईस्कूल के सरकारी स्कूल से 12वीं तक की पढ़ाई हुई है। इसके बाद पीजी कालेज जगदलपुर, जिसे अब बस्तर विश्वविद्यालय के नाम से जाना जाता है, वहां पीसीएम से ग्रेजुएशन किया।

चाचा और मां की प्रेरणा से पाया मुकाम

चाचा ओम प्रकाश ननंदवार ने कलेक्टर बनने की प्रेरणा दी। वह बचपन से ही कहा करते थे कि तुम्हें कलेक्टर बनना है। कलेक्टर बनने से पहले बालको में काम किया। साल 2004 में शिक्षाकर्मी के इंटरव्यू भी दिया था, लेकिन उसमें सफलता नहीं मिली। मगर, मैं निराश नहीं हुआ। जिंदगी का नाम है बढ़ते जाना। मुझे एक सुंदर पंक्ति याद आती है कि ये वक्त भी गुजर जाएगा।

मेरा यही मानना है कि निराशा और आशा जीवन में आती जाती रहती है। बुरा वक्त हमेशा इंसान को मजबूत करता है। मैं भी इसी फलसफे में चलता हूं। इसके बाद मैंने दिल्ली में जाकर सिविल सेवा की तैयारी की। हिंदी माध्यम से पूरी परीक्षा और इंटरव्यू दिया। आखिरकर लगातार कई साल की गई मेहनत रंग लाई और चौथे प्रयास में 227वीं रैंक हासिल कर आईएएस में सेलेक्ट हो गया और ईश्वर की कृपा से होम कैडर मिला। युवाओं को मैं हमेशा कहता हूं कि सही समय पर सही दिशा में किया गया सार्थक प्रयास सफलता का मूल मंत्र है।

मेरे संघर्ष और धैर्य में मेरी मां विमला नंदनवार की दी गई सीख हमेशा काम आई। वह ही मेरी रोल माडल रही हैं। आज मैं जो कुछ भीं हूं, उन्हीं की वजह से हूं। किताबों में तो रोल मॉडल पढ़े हैं, लेकिन असली जिंदगी में किसी को देखकर प्रेरणा मिली, तो वह मेरी मां हैं। हर व्यक्ति में कुछ न कुछ खासियत होती है, मैं लोगों की हर खासियत को आत्मसात कर लेता हूं।

Posted By: Shashank.bajpai

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