राजनांदगांव (नईदुनिया न्यूज)। राज्य शासन का नरवा विकास प्रोजेक्ट जल संरक्षण की दिशा में मील का पत्थर साबित हो रहा है। जिले के राजनांदगांव एवं खैरागढ़ वन मंडल द्वारा नरवा प्रोजेक्ट के तहत प्रभावी कार्य किए जा रहे हैं। विगत दो वर्षों में 14 करोड़ 29 लाख 45 हजार रुपए की लागत से एक लाख 92 हजार 596 नरवा संरचना का निर्माण किया जा चुका है। खास बात यह है कि वैज्ञानिक संरचना गेबियन स्ट्रक्चर, कांटूर ट्रेंच, चेकडेम, लूज बोल्डर चेकडेम, डबरी, परकोलेशन टैंक, डाइक का निर्माण कराया गया है। इन कार्यों से वन क्षेत्र में भू-जल स्तर में वृद्धि हुई है। साथ ही नरवा प्रोजेक्ट से किसानों को पानी मिल रहा है।

स्त्रोतों के जल स्तर में काफी हुआ सुधार : छत्तीसगढ़ शासन की मंशा के अनुरूप जल संरक्षण एवं संवर्धन की महत्ता को समझकर राजनांदगांव एवं खैरागढ़ वनमंडल द्वारा व्यापक स्तर पर नरवा विकास के कार्य किए गए हैं। वैज्ञानिक पद्धति का उपयोग कर बेसलाइन सर्वे के माध्यम से जीआइएस मैपिंग के माध्यम से नरवा का चिन्हांकन किया है। सभी नालों में विभिन्ना गेबियन स्ट्रक्चर, कांटूर ट्रेंच, चेकडेम, लूज बोल्डर चेकडेम, डबरी, परकोलेशन टैंक, डाइक, एनीकट, पांड, स्टाप डेम, ब्रश वुड चेकडेम, गली प्लग संरचनाओं के निर्माण से नरवा प्रोजेक्ट को गति मिली है और भू-जल संरक्षण में आशातीत सुधार हुआ है। नरवा विकास कार्यक्रम से ग्रामीणों को रोजगार तो उपलब्ध हुआ ही है, उनके उपयोग के लिए जल स्त्रोतों के जल स्तर में काफी सुधार हुआ है।

जंगली जानवरों को पानी आसानी से उपलब्ध हो रहाः वनक्षेत्र में नरवा विकास कार्य से जल संवर्धन, मृदा में नमी की वृद्धि के साथ ही साथ भू-जल स्तर में भी वृद्धि होने की निश्चित संभावना है। नरवा विकास कार्य के फलस्वरूप समीपस्थ स्थित ग्रामीणों के किसानी कार्य के लिए पानी की सुलभता एवं वन्यप्राणियों के लिए समय पर पर्याप्त मात्रा में पानी आसानी से उपलब्ध हो रहा है। 88 लघु नालों से बने तीनों नाले स्थानीय नदियों में समाहित होने के उपरांत औसतन लगभग 70-80 किलोमीटर की दूरी तय करके छत्तीसगढ़ की प्रमुख नदियों में से एक शिवनाथ नदी में मिलते हैं, इससे इन स्त्रोतों में वाटर रिचार्ज हो रहा है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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