राजनांदगांव(नईदुनिया प्रतिनिधि)। कोरोना काल में बेरोजगार हुए लोगों को रोजगार के लिए भटकना पड़ रहा है। जिले में तेजी से बेरोजगारों की संख्या बढ़ रही है। कोरोना काल में 17 हजार नये बेरोजगारों ने अपना पंजीयन कराया। लेकिन रोजगार का अब तक पता नहीं है। शिक्षित बेरोजगारों के लिए रोजगार व स्वरोजगार के अवसर कम होते जा रहे हैं। मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना के तहत जिले के शिक्षित बेरोजगारों को अलग-अलग ट्रेडों में प्रशिक्षण दिया गया। लेकिन रोजगार नहीं मिल पाया। स्थिति यह है कि शिक्षित बेरोजगार रोजगार की मांग को लेकर दर-दर भटक रहे हैं। कोरोना के चलते प्रशिक्षण में दो वर्ष से बंद पड़े हैं। इधर, स्वरोजगार के लिए आवेदन करने पर शिक्षित बेरोजगारों को लोन नहीं मिल पा रहा है। प्रधानमंत्री रोजगार योजना में 300 से 500 के बीच युवाओं को सब्सिडी पर बैंकों से लोन दिलाया जाता था। लेकिन जब से 25 लाख तक का लोन देने की योजना शुरू की गई है। तब से लक्ष्य को भी घटा दिया गया है।

विभाग के पास नहीं है जानकारीः जिले में शिक्षित बेरोजगारों का आंकड़ा बढ़ते जा रहा है। जिला रोजगार कार्यालय में 93 हजार बेरोजगारों ने अपना पंजीयन कराया है। कितनों को अब तक नौकरी मिली इसकी भी जानकारी विभागीय अधिकारियों को नहीं है। जिला रोजगार कार्यालय में पंजीकृत 6356 लोगों को मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना के तहत 2018-19 में अलग-अलग ट्रेडों में कुल 6356 लोगों को प्रशिक्षण दिया गया था। लेकिन कितने लोगों को रोजगार मिला इसकी जानकारी विभाग के पास नहीं है।रोजगार मेले का भी पता नहीं जिला रोजगार कार्यालय में समय-समय पर अलग-अलग कंपनियां रोजगार मेला का आयोजन करती थी। लेकिन कोरोना संक्रमण के भय के चलते कंपनियों ने भी रोजगार मेला से हाथ पीछे खींच लिए हैं। कुछ दिनों पहले ठाकुर प्यारे लाल स्कूल में रोजगार मेले का आयोजन किया गया, जो पूरी तरह से औपचारिकता रही। रोजगार मेला नहीं लगने के कारण शिक्षित बेरोजगारों को रोजगार के लिए भटकना पड़ रहा है। कोरोना काल के बाद तेजी से बेरोजगारों की संख्या बढ़ी है। इसकी मुख्य वजह कई लोग बाहर में नौकरी करते थे। नौकरी छूटने के बाद अपने गृहग्राम लौट गए। घर लौटे के बाद नौकरी की आस में जिला रोजगार कार्यालय में अपना पंजीयन कराया।

Posted By: Nai Dunia News Network

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