डोंगरगढ़ (नईदुनिया न्यूज)। त्रि-स्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर प्रशासनिक व्यवस्था शुरू हो गई है। मतदान में केवल पांच दिन ही बाकी है, इसलिए नक्सल प्रभावित तथा राजनीतिक संवेदनशील बूथों का चिन्हांकन कर मतगणना ब्लॉक मुख्यालय में कराने का निर्णय लिया गया है। ब्लॉक की 23 ऐसे ग्राम पंचायत शामिल किए गए है, जहां पर वोटिंग के बाद मतों की गिनती दूसरें दिन यानी एक फरवरी को ब्लॉक मुख्यालय के स्ट्रांग रूम में होगी। हाई स्कूल ग्राउंड को स्ट्रांग रूम बनाया गया है। जहां से मतदान दलों को मत सामग्रियों के साथ रवाना किया जाएगा। रिटर्निंग ऑफिसर ने संवेदनशील पंचायतों के चिन्हांकन के बाद संबंधित सचिवों को अवगत करा दिया गया है। वहीं राजनीतिक रूप से संवेदनशील पंचायतों की काउंटिंग भी ब्लॉक मुख्यालय में करनें का निर्णय लिया गया है। 31 जनवरी को वोटिंग के बाद मतदान पेटियों को सील करके एजेंटों के साथ स्ट्रांग रूम पहुंचेंगे तथा इन चिन्हित 23 पंचायतों की मतपेटियां कमरें में सील कर सुरक्षा कर्मियों के हवालें कर दिया जाएगा। एक फरवरी को सुबह 23 पंचायतों के वोटों की गिनती शुरू होगी।

इन पंचायतों की काउंटिंग होगी ब्लॉक मुख्यालय में

घोटिया, तोतलभर्री, बछेराभांठा, चौथना, बरनाराकला, बोरतलाव, पीपरखारकला, बूढ़ानछापर, कोठीटोला, सीतागोटा, कारूटोला, कनेरी, टाटेकसा, भगवानटोला, चारभांठा, मोहनपुर, बागरेकसा, पीटेपानी, मड़ियान, कोटनापानी, झिंझारी, मुंगलानी को नक्सल प्रभावित क्षेत्र होने से संवेदनशील की श्रेणी में रखा है। वहीं ग्राम पंचायत बेलगांव को राजनीतिक रूप से संवेदनशील माना है। इसलिए इन पंचायतों के पंच, सरपंच, जनपद सदस्य तथा जिला पंचायत सदस्यों के लिए डालें गए वोटों की गिनती मतदान के दूसरें दिन ब्लॉक मुख्यालय में की जाएगी।

96 पंचायतों में ही चुनाव

गौरतलब है कि इस साल में परिसीमन के बाद ब्लॉक में दो नई पंचायतें बनी। जिसके बाद 100 से बढ़कर संख्या 102 हो गई। लेकिन परिसीमन से नाराज हीरापुर के ग्रामीणों ने शासन को हाईकोर्ट में चुनौती दे दी। जिसका नतीजा रहा कि कोर्ट ने चार पंचायतों में चुनाव पर फिलहाल रोक लगानें के आदेश दिए। इसलिए मक्काटोला, गोविंदपुर, मोतीपुर व खूबाटोला में 31 जनवरी को मतदान नहीं होगा। साथ ही तोतलभर्री व मड़ियान में सरपंच निर्विरोध चुन लिए गए है। इसलिए अन्य पदों के लिए यहां पर वोट डालें जाएंगे।

मतदाताओं पर एक नजर

डोंगरगढ ब्लॉक में चार जिला पंचायत सदस्य, 25 जनपद सदस्य, 98 सरपंच व 1378 पंच चुने जायेगे। ब्लाक के एक लाख 23हजार 527 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे जिसमें 62204 पुरूष व 61323 महिलाएं शामिल है वहीं कई पंचायतो में आरक्षण की पेंच में दिग्गज नेता व सरंपंच फंस गये है जो इस बार चुनाव नहीं लड पा रहे है।

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वर्सन...

ब्लॉक के 23 पंचायतों को संवेदनशील की श्रेणी में रखा गया है। इसलिए इन पंचायतों में वोटिंग के बाद दूसरें दिन ब्लॉक मुख्यालय में काउंटिंग कराया जाएगा।

अविनाश ठाकुर, रिटर्निंग ऑफिसर

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पंचायत चुनाव के प्रत्याशियों के प्रचार में आयी तेजी

डोंगरगढ़ (नईदुनिया न्यूज)। त्रि-स्तरीय पंचायत चुनाव को अब पांच दिन शेष रह गये है और यहां राजनीतिक दल से जुडे उम्मीदवारों ने प्रचार प्रसार में तेजी ला दी है। उम्मीदवार ग्रामीणों के घरघर दस्तक देकर उन्हें आकर्षित कर रहे है। तथा अपने साथ चाचा, नाना, भाई बहन सभी को प्रचार में जुटा रखे है। वहीं जनपद सदस्यों का क्षेत्र बडा होने के चलते घर के ही विश्वासपात्र व्यक्तियों के माध्यम से अलग-अलग गांवों में जोडतोड करने में लग गये है।

इसी प्रकार का नजारा समीप ग्राम लालबहादुर नगर में देखने को मिला जहां कल गुरुवार को बाजार का दिन होने के चलते क्षेत्र के उम्मीदवारों ने बडा गांव होनें से प्रचार में अपनी ताकत झोंक दी। यहां पंच, सरपंच, जनपद सदस्य व जिला पंचायत सदस्यों के चुनाव में सिंबाल का प्रभाव देखने को मिल रहा है। वहीं पंच सरपंच में स्थानीय मुददो व व्यक्तिगत चेहरों की बदौलत उम्मीदवार मतदाताओ से वोट मांग रहे है। जहां भाजपा ने धान खरीदी को मुददा बनाया तथा राज्य सरकार को बैकफुट पर रखकर मतदाताओ को रिझाने में लगे है जिसमें धान खरीदी 15 दिन बाद प्रारंभ, 25सौ रू.प्रति क्विं.खरीदी की घोषणा के बाद भी केंद्र की निर्धारित दर से ही धान खरीदना, लिमिट तय होने से किसानों को हो रही परेशानी को प्रचार में बारबार दोहराया जा रहा है तो वहीं कांग्रेस निकाय चुनाव में मिली सफलता को सामने रखकर राज्य सरकार के एक साल के कार्यकाल में हुए कार्यो को आधार बताकर वोट मांग रही है। जहां पंचायत चुनाव में दोनों दल धान को ही मुख्य मुददा बनाकर प्रचार कर रहे है। गौरतलब हे कि हाल ही में प्रशासन ने प्रतिदिन की धान खरीदी की लिमिट को हटा दिया है तथा नरवा धुरवा व बारी प्रोजेक्ट से गांवो के विकास को भी कांग्रेसी बताने से नहीं चूक रहे है। जहां लंबे समय बाद जनपदअध्यक्ष की कुर्सी सामान्य वर्ग के लिए आरक्षति हुई है जिसके कारण जनपद सदस्य का चुनाव लडने में लोग काफी रूचि दिखा रहे है तथा जनपद में बहुमत के लिए 13 का आंकडा चाहिए इसलिए दोनो ही दल अधिक से अधिक सीटें जीतने जददोजहद कर रही है। जहां पिछले आंकडो को देखा जाये तो जनपद अध्यक्ष की कुर्सी पर भाजपा की ही कब्जा रहा है जिससे अध्यक्ष की सीट सामान्य होने से दावेदार भी अधिक ही होंगे।

Posted By: Nai Dunia News Network

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