राजनांदगांव। सिग्नल नहीं मिलने के कारण ट्रेनें बेवजह खड़ी नहीं होगी। रेलवे सिग्नल सिस्टम को दुरुस्त करने जुट गया है। राजनांदगांव से रसमड़ा तक आटोमैटिक सिग्नल(स्वचलित संकेतक) लगाने की कवायद शुरू हो गई है। आटोमैटिक सिग्नल लगने से ट्रेनें एक के पीछे एक दौड़ती हुई नजर आएगी। ट्रेनें यार्ड पर बेवजह खड़ी नहीं होगी। आटोमैटिक सिग्नल से रेल लाइनों पर रफ्तार के साथ ट्रेनों की क्षमता भी बढ़ेगी। खड़ी ट्रेनों को आगे वाली ट्रेन के अगले स्टेशन तक पहुंचने काइंतजार नहीं करना पड़ेगा। स्टेशन यार्ड से ट्रेन के आगे बढ़ते ही पीछे वाली ट्रेन को भी ग्रीन सिग्नल मिल जाएगा।

यानी एक ब्लक सेक्शन में एक के पीछे दूसरी ट्रेनें चलती रहेंगी। अभी तक जो सिस्टम है उसमें एक स्टेशन से ट्रेन छूटने के बाद दूसरे स्टेशन पहुंचने के बाद खड़ी ट्रेनें को छोड़ा जाता है।

हर एक किमी में सिग्नलः रेलवे के अधिकारियों ने बताया कि नई व्यवस्था के अंतर्गत यार्ड के डबल डिस्टेंस सिग्नल से आगे प्रत्येक एक किमी में सिग्नल लगाए जाएंगे। आटोमैटिक सिग्नल लगाने का काम तेजी से चल रहा है। रेलवे के अधिकारियों ने बताया कि आटोमैटिक

सिग्नल के सहारे ट्रेनें एक-दूसरे के पीछे चलती रहेंगी। अगर आगे वाले सिग्नल में तकनीकी खामी आती है तो पीछे चल रही ट्रेनों को सूचना मिल जाएगी। इससे जो ट्रेनें जा रहेगी, वहीं रुक जाएंगी।

इस तरह काम करेगी सिग्नलः राजनांदगांव से डोंगरगढ़ के बीच तीसरी लाइन का काम पूरा हो गया है। महाराष्ट्र सीमा में तीसरी लाइन की कार्य तेजी से चल रहा है। साथ ही आटोमैटिक सिग्नल भी लगाया जा रहा है। अधिकारियों ने बताया कि जगह-जगह सिग्नल से जैसे-जैसे ट्रेनें आगे बढ़ती है, पीछे के सिग्नल स्वतःसंकेत देने लगते हैं। इन संकेतों से ट्रेनों को चलाने में मदद मिलती है। आटोमैटिक सिग्नल में ट्रेनें एक-दूसरे के पीछे चलेंगी, जो यात्रियों को जल्द स्टेशनों तक पहुंचाएगी।

Posted By: Nai Dunia News Network

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