राजनांदगांव। संभागायुक्त महादेव कावरे ने सी-मार्ट और धन्वंतरी जेनेरिक मेडिकल स्टोर का शुक्रवार को निरीक्षण किया। सी-मार्ट में महिला समूहों के उत्पादों को देखकर खरीदी करने से वे अपने आप को नहीं रोक पाए। संभागायुक्त ने वहां घरेलू उपयोग के सामानों की जमकर खरीदारी की।

उन्होंने यहां 2459 रूपये के सामान खरीदे। इस दौरान उन्होंने महिला समूह के उत्पादों की गुणवत्ता की प्रशंसा भी की। कांवरे ने अन्य अधिकारियों से भी कहा कि वे भी अपने घरों के लिए जरूरी सामान सी-मार्ट से ही खरीदें।

संभागायुक्त कावरे शुक्रवार को राजनांदगांव जिले के प्रवास पर रहे। इस दौरान उन्होंने जिला स्तरीय अधिकारियों की बैठक के उपरांत राजनांदगांव में संचालित सी-मार्ट और धन्वंतरी जेनेरिक मेडिकल स्टोर्स का निरीक्षण किया। शहर के जल तरंग कालोनी में संचालित सी-मार्ट के निरीक्षण के दौरान उन्होंने यहां महिला समूह द्वारा विक्रय के लिए रखे गए उत्पादों की गुणवत्ता को देखकर काफी प्रसन्ना हुए। उन्होंने यहां जमकर विभिन्ना प्रकार के सामानों की खरीदारी की।

दैनिक उपयोग के सामानों की खरीदारी : सी-मार्ट में संभागायुक्त कांवरे ने घर में दैनिक उपयोग के सामानों की खरीदारी की। फिनाइल, हारपिक, मच्छर स्प्रे, हैंडलूम टावेल, बेर का अचार, सेंधा नमक, आर्गेनिक चावल, कोदो चावल, आयुर्वेदिक मेथी, अलसी से बने लड्डू की खरीदारी की।

उन्होंने यहां से छत्तीसगढ़ महतारी व छत्तीसगढ़ी राज गीत लिखित प्रतिमा की खरीदारी भी की। संभागायुक्त ने कहा कि गुणवत्ता बरकरार रहनी चाहिए। इससे सी-मार्ट की साख बनी रहेगी और खरीदारी के लिए लोगों का विश्वास बना रहेगा।

'सफल होने के लिए धैर्य और समर्पण की भावना जरूरी'

राजनांदगांव। चातुर्मासिक प्रवचन में जैन संत हर्षितमुनि ने कहा कि सफल होने के लिए धैर्य और समर्पण की भावना जरूरी है। शिकायत और अपेक्षा श्रद्धा में हमेशा सेंध लगाती है। दूरी मायने नहीं रखती भीतर की भावना महत्व रखती है। शबरी ने धैर्य रखा, राम आखिर उनके यहां गए। जबकि उनके पास कुछ भी नहीं था। हमारी भक्ति, तपस्या, साधना कभी खाली नहीं जाती। हमें धैर्य

रखना चाहिए।

प्रकृति हमें धैर्यवान और सहनशील बनाना चाहती है तभी हम सफल हो सकते हैं। लेकिन हम धैर्य नहीं रख पाते और हम अपने लक्ष्‌य के आसपास भटकते रहते हैं। उन्होंने कहा कि हमारी भावना कहां-कहां चली जाती है। मन स्थिर होगा तो श्रद्धा भी स्थिर होगी। गुरु महाराज बच्चों का पूरा ध्यान रखते हैं। लेकिन छोटी-छोटी अपेक्षाओं पर ध्यान नहीं देते। बच्चा यदि गिर जाता है तो मां दौड़कर चली जाती है ऐसे में बच्चा,कच्चा रह जाता है।

श्रद्धा बहुत काम करती हैः उन्होंने कहा कि व्यक्ति यदि तृप्त हो तो दूर से दर्शन में ही वह तृप्त हो जाता है, नहीं तो गुरुदेव कितने भी दर्शन दे दें , समय दे दें ,वह तृप्त नहीं हो पाएगा। हर्षित मुनि ने कहा कि राधा और मीरा में यही अंतर था कि राधा को श्री कृष्ण प्राप्त थे और मीरा ने साधना के जरिए उन्हें प्राप्त किया।

हमारे शरीर में ऐसे ऐसे रसायन हैं कि कभी उसे जागृत करना पड़ता है तो कभी वह स्वयं ही जागृत हो जाता है। मीरा ने जहर का प्याला पिया। लेकिन भक्ति में लीन मीरा को उस पार अलौकिक शक्ति ने विष के प्याले को अमृत में बदलकर बचा लिया। क्योंकि उसमें श्रद्धा थी। उन्होंने कहा कि श्रद्धा बहुत काम करती है। श्रद्धा जिस तरह होती है हमारे भीतर का स्वरूप भी वैसा ही रूप धारण करता है। यदि आपने सकारात्मक सोच को साधा है तो नकारात्मक सोच आपके करीब भी नहीं आएगी। देवतत्व, गुरुतत्व एवं धर्मतत्व पर श्रद्धा हो तो व्यक्ति की खुद पर श्रद्धा जागेगी और उसके मन में आत्मविश्वास जागेगा। भावनाओं में परिवर्तन आए तो बड़ा परिवर्तन हो जाता है।

Posted By: Nai Dunia News Network

NaiDunia Local
NaiDunia Local
  • Font Size
  • Close