राजनांदगांव। दिग्विजय महाविद्यालय विश्व हिंदी दिवस पर हिंदी का वैश्विक स्वरूप और व्यावहारिक हिंदी पर एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। प्राचार्य डा.केएल टांडेकर ने कहा कि विश्व हिन्दी दिवस मनाने का मुख्य उद्देश्य हिंदी भाषा का विश्व स्तर पर मान्यता के लिए प्रयास करना है।

साथ ही पूरे विश्व में हिन्दी का अधिक से अधिक प्रचार-प्रसार करें। ताकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हिंदी भाषा को प्रतिस्थापित कर सकें प्रत्येक भारतीय के लिए यह गौरव का विषय है। साथ ही यह दायित्व है कि हिंदी बोलने, सुनने एवं उसका संचार अलग-अलग क्षेत्रों में करें। हमारे देश में विभिन्ना बोलियां बोली जाती हैं। लेकिन जितना अधिक प्रयोग आज हिंदी भाषा का है किसी अन्य भाषा का नहीं है। हिंदी भाषा का मान, सम्मान व स्वाभिमान बना रहे यह प्रत्येक भारतीयों का नैतिक कर्तव्य है।

पत्रकारिता विभागाध्यक्ष डा.बीएन जागृत ने विश्व हिंदी दिवस को मनाने का उद्देश्य को बताते हुए कहा कि 10 जनवरी 1975 में महाराष्ट्र नागपुर में प्रथम वैश्विक हिंदी सम्मेलन हुआ था। जिसमें 30 देशों के 122 प्रतिनिधि सम्मिलित हुए थे। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने इस सम्मेलन का उद्घाटन किया था।

सन 2006 में पूर्व प्रधानमंत्री डा.मनमोहन सिंह ने प्रतिवर्ष 10 जनवरी को विश्व हिन्दी दिवस मनाने की घोषणा की। तब से प्रतिवर्ष 10 जनवरी को विश्व हिन्दी दिवस मनाया जाता है। जिसका उद्देश्य हिंदी भाषा को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाना है। लेकिन एक सच्चाई यह भी है कि हिंदी को अपने ही घर में उपेक्षा झेलनी पडती है। संयुक्त राष्ट्र संघ की छह अधिकारिक भाषाएं हैं। उनमें हिंदी भाषा नहीं है। डा.जागृत ने कहा कि भारतीय जो विदेशों में निवासरत है उनका भी कर्तव्य है कि हिंदी भाषा का उन क्षेत्रों में प्रसार करें।

भाषा संपर्क का माध्यम

अर्थशास्त्र विभाग की प्राध्यापक डा.सुमिता श्रीवास्तव ने कहा कि भाषा सिर्फ ज्ञान का माध्यम नहीं वह संपर्क का भी माध्यम है। किसी भी भाषा के प्रचार-प्रसार के लिए न केवल साहित्य का बल्कि उस भाषा का सम्पूर्ण ज्ञान होना भी जरुरी है। उन्होंने हिंदी में रोजगार के अवसर को बताते हुए कहा कि एक अनुवादक के रुप में भी हमें अलग - अलग भाषाओं का ज्ञान होना जरुरी है। डा.चंदन सोनी ने हरिवंश राय बच्चन साहब एवं गुलजार साहब की कविताओं का सस्वर वाचन किया। साथ ही अपना मौलिक कविता का पाठ करते हुए हिंदी की महत्ता को बताया।डा. जेनामणी ने कहा कि किसी भी भाषा को सीखने के लिए आपको उस भाषा से प्रेम होना चाहिए।

Posted By: Nai Dunia News Network

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