राजनांदगांव । अगले माह अस्तित्व में आने जा रहे दोनों नए जिलों को लेकर प्रशासनिक कवायद तेज हो गई है। संभागायुक्त महादेव कावरे अधिकारियों की बैठक लेकर प्रशासनिक स्तर पर की जा रही कार्रवाई से रूबरू हुए। नए जिलों में अधिकारी-कर्मचारियों की पदस्थापना और कार्यालय संचालन के संबंध में महत्वपूर्ण निर्देश दिए। साथ ही मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के आगमन की तैयारी की भी समीक्षा की गई।

दुर्ग संभागायुक्त महादेव कावरे ने शुक्रवार को कलेक्टोरेट सभाकक्ष में कलेक्टर डोमन सिंह और मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी एवं खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले के ओएसडी सहित राजस्व व अन्य विभागीय अधिकारियों की बैठक लेकर नए जिलों के अस्तित्व में लाने और मूर्त रूप देने के लिए की जा रही प्रशासनिक गतिविधियों की जानकारी ली। संभागायुक्त ने बैठक में नए जिले के भौगोलिक क्षेत्र के साथ ही जिले के अंतर्गत शामिल ग्राम पंचायतों, जनसंख्या सहित सभी विषयों की तथ्यात्मक जानकारी ली।

पदस्थापना के लिए सहमति की जानकारी ली : बैठक में संभागायुक्त ने दोनों जिलों के अंतर्गत जिला कार्यालय और अन्य विभागों के लिए स्वीकृत सेटअप की जानकारी लेकर इन जिलों में अधिकारी-कर्मचारियों की पदस्थापना और जिलों में पदस्थापना के लिए अधिकारी-कर्मचारियों की सहमति की जानकारी ली। संभागायुक्त ने कहा कि इन जिलों में पदस्थापना के लिए सहमति देने वाले कर्मचारियों की पदस्थापना स्वीकृत सेटअप के अनुसार होनी चाहिए।

'चंद्रमा की तरह शीतल उजाला फैलाने वाले हैं तुलसी दास'

राजनांदगांव ।तुलसीदास की जयंती पर छत्तीसगढ़ साहित्य समिति द्वारा गौरव पथ स्थित गुजराती स्कूल में साहित्यिक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। साहित्य समिति के उपाध्यक्ष एवं स्कूल के पूर्व सचिव गिरीश ठक्कर द्वारा आयोजित उक्त साहित्यिक आयोजन में ज्योतिषाचार्य पंडित सरोज द्विवेदी, साहित्य समिति के अध्यक्ष आत्माराम कोशा व साहित्यकार कुबेर साहू प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। स्कूल के छात्र-छात्राओं द्वारा ज्ञान की देवी मां सरस्वती एवं महाकवि तुलसीदास के तैल चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्जवलन कर कार्यक्रम की शुरुआत की। आचार्य द्विवेदी ने कहा कि संत कवि तुलसीदास ने अपनी विश्व चर्चित रचना श्री रामचरित मानस के माध्यम से जो मर्यादा की जो पाठ पढ़ाई है, समरसता के भाव लोगों में जगाए है 'अगुनहि-सगुनहि, नहि कहु भेदा' कह कर लोगों में व्याप्त मतभेदों को हटाया है वह अद्वितीय है। उन्होंने स्कूल के राम नाम से भव-सागर पार करने की बात कही तथा कहा कि मरा मरा कहते हुए एक दस्यु बाल्मीकि ब्रहम ज्ञानी हो गये। इसी तरह आप लोग भी ध्यान लगा कर पढ़ने से अच्छे अंकों में उत्तीर्ण हो सकते है।

साहित्य समिति के अध्यक्ष कोशा ने बच्चों को तुलसीदास की जन्म से लेकर उसकी पत्नी रत्नावलि द्वारा 'धिक-धिक ऐसे प्रेम' द्वारा दुत्कारे जाने तथा गुरू नरहर्यादास से ज्ञान प्राप्ति के पश्चात महाकवि बनने तक की बाते बताई जिसे बच्चे बड़े ध्यान से सुनते रहे। उन्होंने बताया कि भारत देश के वासी जिस जीवन शैली को जी रहे है उसमें तुलसीदास का रामचरित मानस का बहुत बड़ा योगदान है। कवि केशव की पंक्तिया सूर-सूर तुलसी शशि को उद्घृत करते हुए कोशा ने कहा कि तुलसी दास जी अपनी कालजयी रचना श्री रामचरित्र मानस के माध्यम से चंद्रमा की तरह शीतल व साहित्वक उजियारा फैलाने वाले महा कवि है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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