राजनांदगांव । शासन की सुराजी गांव योजना से ग्रामीण क्षेत्रों में समूह की महिलाओं की तकदीर बदल रही है। छुरिया विकासखंड के 14 गोठानों में बायो क्लाक कल्चर सिस्टम के अंतर्गत नवाचार करते हुए मत्स्य पालन किया जा रहा है। इंडोनेशिया में ईजाद की गई मत्स्य पालन की यह विधि गौठान के समूह की महिलाओं के लिए उत्सुकता एवं जिज्ञासा का विषय भी है। समूह की महिलाएं विशेष रूचि से बायो क्लाक कल्चर सिस्टम से मत्स्य पालन की विधि सीख रही है।

छुरिया विकासखंड के ग्राम पेण्ड्रीडीह, बोरतलाब, पाटेकोहरा, महराजपुर, हालेकोसा, बोईरडीह, मासुल, मानिकपुर, चांदो, खुर्सीटीकुल, महरूम, कलडबरी, कांपा, जोंधरा में नया प्रयोग करते हुए मत्स्य पालन किया जा रहा है। इसके अंतर्गत गौठानों में तालाब के स्थान पर 15 हजार लीटर क्षमता के टैंक में मत्स्य पालन किया जा रहा है। जिसमें मत्स्य पालन के लिए स्थान, पानी एवं चारे को कम करने की तकनीक का उपयोग किया जाता है। गोठानों में तिलापिया एवं कोमलकार की मत्स्य फसल ली जा रही है। छह माह में यह क्राप तैयार हो जाएगा और समूह की महिलाओं को इससे फायदा मिलेगा। एक टैंक से चार से पांच क्विंटल मछली का उत्पादन किया जा सकता है।

साकार हो रहा स्वावलंबन का सपनाः

गोठानों को मल्टी एक्टीविटी सेंटर के रूप में विकसित कर उसे ग्रामोद्योग का रूप देने का प्रयास जिले में सफल होता दिख रहा है। महिलाओं के स्वावलंबन का सपना इसी के साथ साकार भी हो रहा है। गोठानों में तमाम प्रकार की आर्थिक गतिविधियां संचालित की जा रही है। इससे समह कमिहिलाएं आत्मनिर्भर हो रहीं हैं।

प्रो-बायोटिक चारा दिया जा रहाः

कलेक्टर तारन प्रकाश सिन्हा की पहल पर ग्रामीण क्षेत्रों में समूह की महिलाओं के आमदनी में बढ़ोत्तरी करने के लिए नवाचार किए जा रहे है। जनपद सीईओ छुरिया प्रतीक प्रधान ने बताया कि छुरिया विकासखंड में 14 गोठानों में मत्स्य पालन किया जा रहा है। समूह की महिलाओं ने इसमें विशेष रूझान दिखाया है।

उन्हें इसके लिए प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

मत्स्य पालन निरीक्षक संदीप साहू ने बताया कि बायो क्लॉक कल्चर सिस्टम के अंतर्गत हर तीसरे दिन पानी की गुणवत्ता का परीक्षण किया जाता है। इसके अंतर्गत टैंक में एक आक्सीजन मशीन लगी होती है और उन्हें प्रो-बायोटिक चारा दिया जाता है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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