छुईखदान। आजादी के 75 वर्ष होने पर आजादी का महापर्व अमृत महोत्सव मनाया जा रहा है। वहीं 15 अगस्त 1947 को आजादी के प्रतीकात्मक जय स्तंभ का निर्माण देश, प्रदेश के हर नगरों और कस्बों में किया गया है। जिससे बरबस आजादी के बाद निर्मित हुई जयस्तंभ को देखने से पुरानी यादें ताजा हो जाती है। नगर में स्थापित जय स्तंभ नगर के व्यस्ततम चौक जिस के उत्तर में कवर्धा, दक्षिण में राजनांदगांव जिला, पूर्व में धमधा दुर्ग जिला, एवं पश्चिम में बालाघाट जिला मध्य प्रदेश की सीमा लगती है। चौक में प्रातः से ही लोगों की आने जाने का निरंतर क्रम जारी रहता है।

क्योंकि इसी चौक से तहसील, जनपद, पुलिस थाना, सिविल न्यायालय जो पश्चिम में है। नगर के हृदय स्थल पर निर्मित जयस्तंभ नगर पंचायत कार्यालय के अति निकट होने के बाद भी नगर पंचायत में कई अध्यक्ष एवं मुख्य नगरपालिका अधिकारी आए और चले गए। लेकिन किसी ने भी जयस्तंभ चौक का सुंदरीकरण करने का प्रयास नहीं किया गया। यदि जयस्तंभ चौक की सुध लेकर उसके मरम्मत के कार्य को प्राथमिकता के आधार पर कराया जाता तो आज जयस्तंभ अपने वजूद की लड़ाई लड़ते नहीं दिखता।

दशकों से नहीं हुई सुंदरीकरण

जयस्तंभ में जो घेरा बनाया गया है वह जर्जर हो गया है। लोग शराब पीकर उसी में बैठते हैं। जयस्तंभ के बाउंड्री के अंदर मार्बल लगाया जाना चाहिए। जबकि इसी चौक के किनारे में बलिदानी अवंतीबाई की स्टैच्यू लगाई गई है। जिससे प्रतिवर्ष उसके आकर्षण को बनाए रखने रंग रोगन, स्थल की साफ सफाई की जाती है। जबकि आजादी के प्रतीक जय स्तंभ की हालत बहुत दयनीय हो चुकी है।अन्य स्थानों में बने जय स्तंभ का सुंदरीकरण किया गया है। लेकिन छुईखदान में बना जयस्तंभ वैसे कि वैसा है जो दशकों से किसी भी प्रकार का कोई सुंदरीकरण का कार्य नहीं किया गया है।

पुतला दहन करने का बना स्थल

वर्तमान में जयस्तंभ के हालत बेहद जर्जर हो गई है। अब इस चौक पर राजनीतिक पार्टियों लोगों की खुशी एवं विरोध का स्थल बना हुआ है। खुशी के मौके पर लोग यहां आकर पटाखे फोड़ते हैं। वहीं विरोध के दौरान धरना प्रदर्शन और पुतला दहन करने का महत्वपूर्ण स्थल बन चुका है। यदि शहर में दशकों पुराने जय स्तंभ चौक सुंदरीकरण और मरम्मत के प्रति राजनीतिक पार्टियों ने ध्यान दिया होता तो आज जय स्तंभ की दुर्दशा इतनी खराब नही होती। हालांकि वर्ष में दो बार राष्ट्रीय पर स्वतंत्रता दिवस एवं गणतंत्र दिवस के एक दिन पूर्व लोक निर्माण विभाग द्वारा जय स्तंभ की चूने से पुताई कर दी जाती है। जय स्तंभ के पास विद्युत की कोई व्यवस्था नहीं है।

पीआइसी की बैठक में अनुमोदन करवाने के बाद जयस्तंभ चौक का सुंदरीकरण कार्य किया जाएगा।

-सुशील कुमार चौधरी, सीएमओ छुईखदान

जयस्तंभ का सुंदरीकरण जरुरी है। कुछ माह पूर्व जगन्नााथ सेवा समिति के साथी तत्कालीन कलेक्टर तारण प्रकाश सिन्हा से मिलकर सुंदरीकरण की मांग रख चुके हैं।

-संजीव दुबे, संरक्षक जय जगन्नााथ सेवा समिति

Posted By: Nai Dunia News Network

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