राजनांदगांव । शिक्षकों द्वारा दिए गए संस्कार बच्चो की दुनिया को उनकी युवावस्था में किस तरह सोने पे सुहागा की कहावत से जोड़ जाती है इसका एक बेहतरीन उदाहरण रविवार रविवार को शहर के एबिस ग्रीन रोटल में इतिहास रचता देखा गया। अपने शिक्षकों के आशीर्वाद की तमन्नाा लिए 25 वर्ष पूर्व स्कूल छोड़ चुके विद्यार्थियों ने एक ऐसा आयोजन किया जिसे हर शिक्षक ने संस्कारों की पाठशाला से जोड़ते हुए अपने मानस पटल पर अंकित कर लिया।

शिक्षकों को गुरु का दर्जा यूं ही नहीं दिया जाता है। 25 वर्ष पूर्व अपनी स्कूली शिक्षा पूरी कर वेसलियन इंग्लिश स्कूल से विदा हुए बच्चों ने उन दिनों की मधुर याद और अपनी बाल-सुलभ हरकतों को एक बार फिर यादों के चलचित्र में जीवित कर दिया। कार्यक्रम संयोजक के रूप में गुरमीत सिंह सलूजा तथा अभय कोटडिया ने अपने मित्रों को जोड़ने पूरे तीन से चार माह कठिन परिश्रम किया। आखिरकार वह घड़ी आ ही गई जब 15 मई की शाम गुरु और शिष्य ने खट्टी- मीठी यादों का पिटारा खोलते हुए पवित्र रिश्ते को और मजबूत डोरी में बांध दिया।

गाजे - बाजे और आतिशबाजीः शिक्षकों के सम्मान में आयोजित कार्यक्रम में उत्सवी माहौल देखा गया। गाजे - बाजे और आतिशबाजी की रोशनी में शिक्षकों के स्वागत ने जीई रोड से गुजरने वालों को भी एक बार रुकने और नजारा देखने विवश कर दिया।

कार्यक्रम के शुरुआत में कोरोना काल तथा उससे पूर्व शिक्षक बिरादरी के पूर्व प्राचार्य डा. केशव राव, सुरेश कुमार सिंह तथा जेआर जेम्स के इस दुनिया से चले जाने पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि देते हुए

याद किया गया।

अनुभवों व यादों को साझा कियाः अपने प्रिय विद्यार्थियों को आशीर्वचन के शब्द कहते हुए वसुंधरा पांडे, एमटी लाल, राजिया सुल्ताना, डा. सूर्यकांत मिश्रा, एस. रंजन, पंकज राम, रिटायर्ड लेफ्टिनेंट कर्नल पीके ठाकुर, आर्मी ऑफिसर प्रणय डागा, एस झा, पी. कुमार, मैथ्यू आर बालाकृष्णन ने उज्ज्वल भविष्य की कामना की। इस दौरान शिक्षकों ने भी अपने अनुभवों व पुरानी यादों को साझा किया।

Posted By: Nai Dunia News Network

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