राजनांदगांव(नईदुनिया प्रतिनिधि)। संस्कारधानी में एक बार फिर आपसी सोहार्द और हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल सामने आई है, जहां एक मुस्लिम परिवार ने युवती का हिंदू-बौद्ध रीति-रिवाज से विवाह कराया बल्कि बेटी का कन्यादान कर सामुदायिक एकता की मिसाल पेश की है। वर-वधु मुस्लिम परिवार का साथ व स्नेह पाकर काफी खुश हैं।

सृष्टि कालोनी के अटल आवास में रहने वाली दीपमाला का माता-पिता का बचपन में निधन हो गया। जिसके बाद मुस्लिम परिवार ने दीपमाला की बेटी की तरह परवरिश की। इसके बाद उम्र होने पर बौद्ध समाज के युवक के साथ हिंदू-बौद्ध रीति-रिवाज से उसकी शादी भी कराई और दीपमाला को डोली में बिठाकर विदा किया।

बेटी की तरह की परवरिश : अटल आवास के रहवासी अब्दुल नवी कुरैशी और शाहिदा कुरैशी ने दीपमाला का बेटी की तरह परवरिश करते हुए उसका पालन-पोषण किया। इसके बाद रीति-रिवाज से शादीकर कन्यादान भी किया। बता दें कि दीपमाला जो कि बाल्यकाल से ही माता-पिता के साये से महरूम हो चुकी थी तथा उसका पालन पोषण एक मुस्लिम परिवार ने किया था। अजय नामक एक बौद्ध लड़के से उसी परिवार ने हिंदू और बौद्ध रीति-रिवाज से शादी करवाई व उसे डोली में बिठाकर विदा किया। इस पूरे मामले की साक्षी बनी राजनांदगांव की महापौर हेमा सुदेश देशमुख। उन्होने इसे संस्कारधानी के धार्मिक सौहार्द्र का बेहतर उदाहरण बताया। वर-वधु को आशीर्वाद देने महापौर हेमा देशमुख, पूर्व महापौर सुदेश देशमुख, सहित अनेक गणमान्य उपस्थित रहे। राजनांदगांव(नईदुनिया प्रतिनिधि)। संस्कारधानी में एक बार फिर आपसी सोहार्द और हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल सामने आई है, जहां एक मुस्लिम परिवार ने युवती का हिंदू-बौद्ध रीति-रिवाज से विवाह कराया बल्कि बेटी का कन्यादान कर सामुदायिक एकता की मिसाल पेश की है। वर-वधु मुस्लिम परिवार का साथ व स्नेह पाकर काफी खुश हैं।

सृष्टि कालोनी के अटल आवास में रहने वाली दीपमाला का माता-पिता का बचपन में निधन हो गया। जिसके बाद मुस्लिम परिवार ने दीपमाला की बेटी की तरह परवरिश की। इसके बाद उम्र होने पर बौद्ध समाज के युवक के साथ हिंदू-बौद्ध रीति-रिवाज से उसकी शादी भी कराई और दीपमाला को डोली में बिठाकर विदा किया।

बेटी की तरह की परवरिश अटल आवास के रहवासी अब्दुल नवी कुरैशी और शाहिदा कुरैशी ने दीपमाला का बेटी की तरह परवरिश करते हुए उसका पालन-पोषण किया। इसके बाद रीति-रिवाज से शादीकर कन्यादान भी किया। बता दें कि दीपमाला जो कि बाल्यकाल से ही माता-पिता के साये से महरूम हो चुकी थी तथा उसका पालन पोषण एक मुस्लिम परिवार ने किया था। अजय नामक एक बौद्ध लड़के से उसी परिवार ने हिंदू और बौद्ध रीति-रिवाज से शादी करवाई व उसे डोली में बिठाकर विदा किया। इस पूरे मामले की साक्षी बनी राजनांदगांव की महापौर हेमा सुदेश देशमुख। उन्होने इसे संस्कारधानी के धार्मिक सौहार्द्र का बेहतर उदाहरण बताया। वर-वधु को आशीर्वाद देने महापौर हेमा देशमुख, पूर्व महापौर सुदेश देशमुख, सहित अनेक गणमान्य उपस्थित रहे।

Posted By: Nai Dunia News Network

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