राजनांदगांव। कमला देवी राठी महिला स्नातकोत्तर महाविद्यालय के राजनीति विज्ञान विभाग द्वारा सुभाषचंद्र बोस की 125 वीं जयंती मनाई गई। इस दौरान आनलाइन व्याख्यान का आयोजन किया गया। बीए अंतिम की छात्रा सोनाली देवांगन ने बताया कि सुभाष चंद्र बोस ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरूआत देश में चल रहे असहयोग आंदोलन से की। सुभाष चंद्र बोस क्रांतिकारी विचारों के थे। उनके अंदर असीम साहस अनूठे शौर्य और अनूठी संकल्प शक्ति का अनंत प्रवाह मौजूद था। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान उन्हे 11 बार जेल जाना पड़ा पर वे अपने फौलादी इरादो से कभी भी टस से मस नहीं हुए। उन्होने कांग्रेस से अलग होने के बाद मई 1939 में फारवर्ड ब्लाक नामक एक नए राजनीतिक दल स्थापना की। इसके अंतर्गत उनके विचार सम्राज्यवाद राज्य, आर्थिक विकास के वैज्ञानिक तरीके, अंतकरण की स्वतंत्रता, समान अधिकार पर ध्यान केंद्रित किया।

आजाद हिंद फौज के गठन पर डाला प्रकाश

समुन सोनी ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस के जन्म दिवस से संबंधित प्रेरक कविता प्रस्तुत की। संजना मिंज ने आजाद हिंद फौज के निर्माण पर प्रकाश डाला। सुभाषचंद्र बोस ने 1943 में आजाद हिंद फौज बनाई इससे उनकी संगठन शक्ति का परिचय मिला। तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हे आजादी दूंगा का नारा दिया। इससे भारतीयों के मन में देश भक्ति की भावना और बलवान होती थी। राजनीति विज्ञान विभाग की आबेदा बेगम ने बताया कि सुभाषचंद्र बोस ने 1922 में उत्तर बंगाल के बाद पीड़ितो की अद्भूत सहायता करके अपने कौशल का परिचय दिया। सुभाषचंद्र बोस ने राष्ट्रीय एकता पर अपना विचार व्यक्त करते हुए कहा था कि स्वतंत्र हो जाने पर यदि हम एक राष्ट्र के रूप में संगठित होना चाहते है तो हमें कठोर मेहनत करनी होगी। राष्ट्रीय एकता और संगठन को विकसित करने के लिए कई बातों की जरूरत है एक सामान्य भाषा एक सामान्य वेशभूषा एक सामान्य आहार वगैरह आपने सुभाष चंद्रबोस के जीवन से जुड़े प्रेरक प्रसंग बताए विद्यार्थियों को जिससे दृढ़ संकल्प एकाग्रता और कर्मठता की सीख मिलती है। आजादी की लड़ाई में नेता जी का नाम स्वर्ण क्षरों में अंकित है।

Posted By: Nai Dunia News Network

NaiDunia Local
NaiDunia Local