राजनांदगांव। स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम उत्कृष्ट विद्यालय में कक्षा पहली में प्रवेश की आयु सीमा बढ़ा दी गई है। अब छह वर्ष तक की आयु वाले बच्चों को प्रवेश की पात्रता होगी। पहले यह साढ़े पांच साल था। आयु सीमा बढ़ने से कई पालकों को राहत मिलेगी। इस बीच जिले में प्रवेश की प्रक्रिया जारी है।

सर्वेश्वर दास नगर पालिक निगम अंग्रेजी माध्यम उत्कृष्ट विद्यालय में कक्षा पहली के प्रवेश की कार्रवाई की गई।

जिसमें 1083 आवेदन प्राप्त हुए। 567 आवेदन निरस्त हुए तथा स्कुटनी के पश्चात 516 बच्चों को लाटरी के माध्यम से कुल 50 का चयन किया गया, जिन्हें निश्शुल्क शिक्षा का लाभ दिया जाएगा। स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम उत्कृष्ट विद्यालय में शिक्षा के अधिकार के 25 प्रतिशत गरीब बच्चों को निजी विद्यालयों में प्रवेश दिए गए नियम लागू नहीं होते।

बल्कि प्रदेश में संचालित स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम उत्कृष्ट विद्यालय में कक्षा पहली से बारहवीं तक शत-प्रतिशत बच्चों को निश्शुल्क शिक्षण का लाभ दिए जाने के लिए शत प्रतिशत सीटों पर नियमानुसार प्रवेश दिया जा रहा है। जिसमें 50 प्रतिशत सीटे बालिकाओं के लिए आरक्षित है। 25 प्रतिशत बीपीएल के लिए तथा 25 प्रतिशत सीट खुला प्रवेश आरक्षित है।

सभी आवेदनों को मिलाकर निकाल दी लाटरी

राजनांदगांव। छत्तीसगढ़ पालक संघ का आरोप है कि प्रवेश प्रक्रिया में मनमानी की जा रही है। संघ की तरफ से जारी बयान के अनुसार सर्वेश्वदास नगर पालिक निगम स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी मीडियम स्कूल में प्रवेश के लिए आनलाइन भरे आवेदनों के लिए आफलाइन लॉटरी निकाली गई। डीपीआई के नियम-निर्देशों का हवाला देकर मनमानी करने का आरोप पालक लगातार लगा रहे है। पहले 567 रिजेक्ट आवेदनों को छिपाया गया। पालकों को आज तक यह नहीं बताया गया है कि उनके बच्चों के आवेदनों को किन कारणों से अपात्र कर दिया गया।

जब कक्षा छठवीं से लेकर आठवीं तक प्राप्त आवेदनों के लिए राटरी निकाली जा रहा थी और जब 25 प्रतिशत सीट जो आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए आरक्षित है, उनके लिए लाटरी निकालते समय उस आवेदनों में जब एपीएल के आवेदनों को भी सम्मिलित कर दिया गया, तो पालको ने विरोध किया। उन्होंने कहा कि गरीब बच्चों के लिए आरक्षित सीटों को अमीरों को क्यों दिया जा रहा है, तो वहां उपस्थित प्राचार्य और डीएमसी ने डीपीआई के आदेशों का हवाला दिया गया।

पालकों ने आदेश दिखाने की मांग की गई तो आदेश दिखाया गया तो उस आदेश में ऐसा लिखा ही नहीं था कि बीपीएल आवेदनों के साथ एपीएल के आवेदनों को मिलाकर लाटरी निकाली जाए।

नियमानुसार फिर से निकाली जाए लाटरीः

पालक संघ के अनुसार लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआई) ने 31 मार्च 2022 को यह निर्देश दिया था कि बालिकाओं के लिए 50 प्रतिशत सीट, 25 प्रतिशत बीपीएल और 25 प्रतिशत सीट एपीएल के लिए आरक्षित किया जाए, लेकिन प्राचार्य और डीएमसी ने मिलकर बीपीएल में एपीएल आवेदनों मिलकर लाटरी निकाल दी। पालक संघ का कहना है ऐसी मनमानी सभी कक्षाओं के लिए निकाली गई लाटरी में की गई है। इसलिए लाटरी पुनः नियमानुसार निकाली जानी चाहिए, क्योंकि लाटरी निकालने में मनमानी की गई है और डीपीआई के निर्देशों का उल्लंघन किया गया है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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