राजनांदगांव। नईदुनिया प्रतिनिधि

मानसून की बेरुखी से परेशान किसानों को अब बिजली की आंखमिचौली का सामना करना पड़ रहा है। दिनभर मेंटनेंस के नाम पर बिजली बंद की जा रही है तो शाम होते ही लो वोल्टेज से पंप पानी नही दे रहा है। बिना पानी के खेतों में दरारें पड़ चुकी है। धान सूखने लगी है। खेतों की हालत देखकर किसान कभी बारिश के लिए मंदिरों में माथा टेक रहे हैं तो कभी बिजली कंपनी के आफीस के चक्कर काटते नजर आ रहे हैं। खेत में बोर, बोर में पानी होने के बाद भी बिजली की सप्लाई नही होने से किसान अपनी आंख के सामने सूखते देख रहे हैं। कहानी है जिला मुख्यालय से मजह 25 किमी दूर घुमका के ग्राम सलोनी की जहां के 14 किसानों के पास कम बारिश के बाद भी सिंचाई के पर्याप्त पानी व संसाधन होने के बाद केवल बिजली कंपनी की अनदेखी की वजह से सैकड़ों एकड़ की फसल सूखने की कागार पर है। किसानों को केवल अपने गांव में एक ट्रांस्फार्मर लगवाने की मांग है जिसके लिए वे बिजली विभाग की डीई से लेकर विधायक तक आवेदन लगा चुके हैं। लेकिन अभी तक कोई सुनवाई नही हुई है।

दरअसल गांव से दो किमी दूर सरदार बाड़ी में सालों पुराना ट्रांसफार्मर लगा हुआ है। पहले इस ट्रांसफार्मर से आठ बोरिंग में कनेक्शन दिया गया था। इस साल उसी ट्रांसफार्मर से कनेक्शन बढाकर 14 कर दिया गया है। जिसकी वजह से किसी भी किसान को पर्याप्त मात्रा में बिजली नही मिल रही है जिससे पंप चल सके।

0 जीरो पावर रहती है बिजली

एक ही ट्रांसफार्मर से ज्यादा कनेक्शन होने के कारण पूरे क्षेत्र में बिजली सप्लाई जीरो पावर की हो जाती है। ग्रामीणों का कहना है की सप्लाई जीरो होने से बल्ब तक नही जलता मोटर चलाने की बात तो दूर है। कई बार वे बिजली कंपनी से इसकी शिकायत भी कर चुके हैं लेकिन समाधान अब तक नही निकाला जा सका है। पूरे मामले की जानकारी रखने वाले घुमका के जेई से 9171883243 पर लगातार संपर्क करने की कोशश की गई लेकिन पहले तो रिंग जाती रही कोई जवाब नही आया फिर शाम तक मोबाइल बंद कर दिया गया।

1. पंप खराब हो चुका

चार एकड़ खेत में धान लगाया है। अब बारिश तो हो नही रही है बोरवेल ही एक सहारा है लेकिन बिजली सप्लाई पर्याप्त नही होने से दो बार पंप खराब हो चुका है।

-रूपेन्द्र कुमार साहु, किसान

2. कोई सुनवाई नही

एक ट्रांसफार्मर लगा देने से पूरे गांव की समस्या ठीक हो जाएगी लेकिन कई बार शिकायत करने के बाद कोई सुनवाई नही हो रही है। अब आंदोलन का रास्ता ही बच गया है।

-गोपाल सिंह यादव, किसान