राजनांदगांव। नईदुनिया प्रतिनिधि

बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने नर्सिंग होम एक्ट लागू किया गया है। इस एक्ट में अवैध रूप से संचालित हास्पिटल व क्लीनिकों पर कार्रवाई का प्रावधान है, मगर इसके बाद भी जिले में कई निजी हास्पिटल व क्लीनिक अवैध तरीके से संचालित हो रहे हैं। नर्सिंग होम के साथ कई पैथालॉजी भी बगैर लाइसेंस चल रहा है। मजेदार बात तो यह है कि स्वास्थ्य विभाग के पास ही आंकड़ा है कि जिले में कुल 29 निजी हास्पिटल हैं, जिसमें से चार बगैर लाइसेंस के संचालित है। नर्सिंग एक्ट के निर्धारित मापदंड का पालन नहीं करने के बाद भी इन क्लीनिकों के खिलाफ अभी तक स्वास्थ्य विभाग की एक कार्रवाई सामने नहीं आयी है। यही नहीं विभागीय अफसर निजी हास्पिटल व क्लीनिकों की जांच तक नहीं कर रहे हैं। शायद यही वजह है कि जिले के कई निजी हास्पिटल व क्लीनिकों में अनट्रेड डाक्टर व नर्स मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा देने के बजाए उनके स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। इसका ताजा उदाहरण शहर में संचालित शुक्ला मल्टीस्पेशलिटी हास्पिटल है, जहां एक बीए पास डाक्टर की लापरवाही के चलते एक एमआर रहे युवक की मौत हो चुकी है।

शुक्ला हास्पिटल में मिली थी खामियां : बेलगांव में रहने वाले 23 वर्षीय पुलकेश साहू की मौत को लेकर परिजनों ने जब शिकायत की, तब जाकर स्वास्थ्य विभाग ने नर्सिंग होम एक्ट के तहत शुक्ला मल्टीस्पेशलिटी हास्पिटल की जांच की। जहां कई खामियां सामने आयी। स्टाफ तक अनट्रेंड पाया गया। यही नहीं हास्पिटल में पर्याप्त जगह का अभाव भी मिला। लैब टेक्निशियन भी अनट्रेंड था। वहीं हास्पिटल में भर्ती के बाद जिस डाक्टर ने पुलकेश साहू की प्रारभिंक जांच की थी, वो भी बीए डिग्रीधारी मिला। यानी बीए पास डाक्टर चमन निषाद ने पुलकेश के इलाज में लापरवाही की। जिसके कारण पुलकेश की मौत हो गयी। इसका मामला बसंतपुर थाने में दर्ज हैं। पुलिस ने बीए पास डाक्टर चमन निषाद के साथ खुद को न्यूरासर्जन बताने वाले डा. प्रतीक कौशिक के साथ प्रबंधन के खिलाफ धारा 420, 304 ए व 34 के तहत अपराध पंजीबद्ध है। इस मामले में भी स्वास्थ्य विभाग नर्सिंग होम एक्ट के तहत अब तक कोई कार्रवाई नहीं की है।

जानिए क्या है नर्सिंग एक्ट का नियम

नर्सिंग होम एक्ट के निर्धारित मापदंड पर खरा उतरने के बाद ही निजी अस्पताल संचालकों को लाइसेंस जारी होता है। निजी हास्पिटल व नर्सिंग होम समेत क्लीनिकों में एमबीबीएस डाक्टर का होना जरूरी है। एमबीबीएस डाक्टर ही नियम व शर्तों के अनुसार क्लीनिक संचालित कर सकते हैं। नर्स व वार्ड ब्वाय समेत पूरा स्टाफ प्रशिक्षित होना चाहिए। हास्पिटल परिसर में मरीजों के इलाज के साथ पर्याप्त जगह होना भी जरूरी है। मगर जिले में दर्जनों निजी हास्पिटल बगैर प्रशिक्षित स्टॉफ के चल रहे हैं। इस तरह की खामियों के बाद भी स्वास्थ्य विभाग अनदेखी कर रहा है।

आवासीय मकान में नर्सिंग होम

जिले में कई ऐसे निजी हास्पिटल व नर्सिंग होम हैं, जो आवासीय मकानों में चल रहे हैं। नर्सिंग होम एक्ट के तहत यह गलत है, पर फिर भी बेखौफ संचालित है। ग्रामीण क्षेत्र में भी एक से दो कमरे में ज्यादातर क्लीनिकों का संचालन हो रहा है। जबकि गांवों के अधिकांश क्लीनिक में कोई डिग्रीधारी डाक्टर ही नहीं है। इसी तरह पैथालॉजी लैब का भी संचालन नर्सिंग एक्ट के विपरित चल रहा है। इनमें से कई जगहों पर मरीजों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ भी हो चुका है। कई बार तो मरीजों की जान पर भी बन आयी है। जिसके बाद भी निजी क्लीनिक व पैथालॉजी सेंटरों के संचालन में मनमानी की जा रही है।

'निजी हास्पिटल और क्लीनिकों की जांच चल ही रही है। जिले में कुल 29 निजी हास्पिटल हैं, जिसमें से चार हास्पिटल के पास लाइसेंस नहीं है। लाइसेंस नवीनीकरण की प्रक्रिया में है, जिसकी जांच की जा रही है। कभी भी नर्सिंग होम व क्लीनिकों में जांच की जाती है। ग्रामीण क्षेत्रों में बीएमओ के माध्यम से जांच कराते हैं। अभी तक गड़बड़ी जैसी शिकायत कहीं से नहीं मिली है।'

-डॉ. अल्पना लुनिया, नोडल अधिकारी नर्सिंग होम एक्ट

Posted By: Nai Dunia News Network