राजनांदगांव (ब्यूरो) शिवनाथ नदी पर मोहारा में बने पुल की एप्रोच रोड की दरार लगातार बढ़ती जा रही है। पुल और सड़क के बीच तेजी से कटाव हो रहा है। इससे आशंका बढ़ है कि यह रोड फिर से कभी भी धंस सकती है। इस बीच भद पिटने के डर से प्रशासन ने आनन-फानन में भरी बारिश में उस जगह की मरम्मत भी शुरू करा दी है। हालांकि जानकारों का कहना है कि इससे दरारों का बढ़ना नहीं रूकने वाला।

पुल और सड़क के बीच दरार पड़ने की खबर के बाद सेतू निगम के कुछ कर्मचारियों ने स्थल पर पहुंचकर मजदूरों से दरारों में डस्ट भराई का कार्य कराया है। लेकिन बढ़ती दरार के आगे यह लीपापोती भी नाकाफी साबित हो रही है। सीएम के निर्देश व पिछली बारिश में हुई तबाही के बाद भी अधिकारियों ने सड़क के निर्माण में गंभीरता नहीं दिखाई। जिसकी वजह से साल की पहली ही बारिश के बाद ही एप्रोच रोड फिर से धसकने लगी है। उल्लेखनीय है कि साल 2013 के पहली बारिश में तबाह हुई सड़क के मरम्मत के लिए मुख्यमंत्री से ढाई करोड़ रुपए दिए थे। मरम्मत में गंभीरता बरतने के निर्देश जारी किए थे। लेकिन बेपरवाह ठेकेदार और लापरवाह अधिकारियों की मिलीभगत ने मुख्यमंत्री के निर्देशों की ही धज्जियां उड़ा दी।

नईदुनिया ने किया था आगाह

एप्रोच रोड के निर्माण के समय ही इसकी घटिया गुणवत्ता व मापदंड में बरती जा रही अनियमितता को लेकर नई दुनिया ने 15 जून को ही खबर प्रकाशित की थी। जिसके बाद जिम्मेदार अधिकारियों ने इसकी जांच करने की भी बात कही थी लेकिन निर्माण स्थल से केवल औपचारिकता पूरी करके लौटने वाले अधिकारियों की लापरवाही अब सामने आने लगी है। यह खबर 19 जून को प्रकाशित की गई थी।

तीन इंच तक धंसी सड़क

तीन दिनों से लगातार हो रही बारिश के बाद उक्त सड़क के वाहनों के आवाजाही से सड़क पूल के लेबल से करीब 3-4 इंच तक नीचे धंस गई है। वहीं इस सड़क पर अब जगह-जगह से दरारें पड़ने लगी है, जिसके बाद बरसात के आगामी दिनों में इस सड़क के टिकने की गारंटी नहीं दिख रही है।

अब दे रहे पहरा

मंगलवार को नई दुनिया में सड़क पर दरार की खबर प्रकाशित होने के बाद जिम्मेदार अधिकारी बुधवार की सुबह से ही मजूदरों की टोली लेकर सड़क पर बैठे हुए नजर आए। इन अधिकारियों ने पहले तो दरारों पर मजदूरों से डस्ट डलावाए फिर देर शाम तक ये अधिकारी सड़क की पहरेदारी करते नजर आए।

लापरवाही छिपाने मिट्टी और डस्ट

सेतू निगम के अधिकारी जहां सड़क की दरारें छुपाने के लिए डस्ट का उपयोग कर रहे हैं। वहीं माहभर पहले जल सांसाधन विभाग द्वारा बनाए गए एनीकट के तटबंध में भी दरारें पड़ गई थी, जिसे भी छिपाने के लिए अधिकारियों ने तटबंध के ऊपर रेत व मिट्टी डाल दी थी। लेकिन इन घटिया निर्माण के लिए ठेकेदारों पर किसी तरह की कार्रवाई नहीं की गई। पानी उतरने के बाद पता चलेगा कि एनीकट का क्या हाल है?

वर्सन -

दरार बढ़ने जैसी कोई बात नहीं है। यह हल्की-फुल्की दरारें है। इसे डस्ट डालकर ठीक कर लिया गया है। हम स्थल पर पहुंचे थे। यह कोई मेजर प्राब्लम नहीं है।

जीपी पवार, ईई, सेतू शाखा, लोक निर्माण विभाग