Rajnandgaon News: राजनांदगांव। नदी में नहाने गया 10 साल का मासूम बच्चा तेज बहाव में चट्टानों के बीच फंस गया। बच्चे को निकालने एनडीआरफ की 20 सदस्यीय टीम ने रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया और 14 घंटों की मशक्कत के बाद उसे चट्टानों के बीच से बाहर निकाला गया। नदी का बहाव तेज होने की वजह से इस रेस्क्यू ऑपरेशन में भी दिक्कतें आ रही थीं। नर्मदा एनीकट का गेट बंद कर बहाव को कम किया गया। उसके बाद ड्रील मशीन के जरिये चट्टान को तोड़ कर बच्चे का पैर चट्टानों के बीच से रात करीब 2 बजे बाहर निकाला गया। सोमवार की दोपहर यह बच्चा नदी में नहाते हुए चट्टानों के बीच की दरार में जा फंसा था।

छत्तीसगढ के राजनांदगांव जिले में ग्राम जगमड़वा के आश्रित गांव रैमड़वा में नर्मदा से बहने वाली नदी में ठंढार का दस वर्षीय अनिल पिता लालजी पारथी दोपहर करीब एक बजे अपने दोस्तों के साथ नहाने गया था। दोस्तों के साथ अनिल ने नदी में छलांग लगाई और नहाते हुए नदी के बीच चट्टान में पहुंच गए। चट्टान से भी अनिल दोस्तों के साथ छलांग लगाकर नहा रहा था, तभी अचानक चट्टान में अचानक अनिल का पैर फंस गया। कई कोशिशों के बाद भी पैर बाहर नहीं निकला। इसके बाद अनिल ने दोस्तों को आवाज लगाई, लेकिन अनिल के दोस्तों की मदद भी काम नहीं आई। इसके बाद अनिल के साथ गए उनके दाेस्तों ने गांव पहुंचकर परिजनों व ग्रामीणों को इसकी जानकारी दी।

नदी में पानी का तेज बहाव देख परिजन सकते में आ गए। ग्रामीणों ने पुलिस व प्रशासनिक टीम को सूचना देकर मदद की गुहार लगाई, जिसके बाद एक घंटे के भीतर पुलिस और प्रशासनिक टीम गांव पहुंची और रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। जिला स्तर की टीम को भी इसकी जानकारी दी गई, लेकिन करीब सात घंटे के बाद भी गोताखोर और जिला स्तर की टीम गांव नहीं पहुंची थी। इसको लेकर ग्रामीणों में जमकर आक्रोश तक दिखा। आखिरकार एनडीआरएफ की 20 सदस्यीय टीम भिलाई से यहां पहुंची और फिर बच्चे को वहां से निकालने के लिए रेस्क्यू आॅपरेशन शुरू किया। चट्टानों को काटा गया और 13 घंटे की मशक्कत के बाद रात करीब 2 बजे बच्चे को वहां से सकुशल बाहर निकाल लिया गया। इस दौरान बारिश का भी डर लगातार बना हुआ था। यदि तेज बारिश होती तो रेस्क्यू ऑपरेशन में खासी दिक्कतें आ सकती थीं।

एनीकट के गेट को बंद कर बहाव को किया कम

बच्चे का पैर नदी के बीच चट्टान में फंसने के बाद ग्रामीणों ने नर्मदा एनीकट पहुंचे। यहां एनीकट के गेट में रेत से भरी बोरियां रखकर बहाव को कम किया गया। जिसके बाद रेस्क्यू टीम के लोग चट्टान तक पहुंचे। आटोमैटिक ड्रील मशीन के जरिये चट्टान को तोड़ने का प्रयास रात करीब दस बजे तक जारी रहा। तब तक बच्चा पैर फंसने के कारण दर्द से चीख रहा था। उसे रेस्क्यू की टीम ने खाद्य सामग्री भी दी। इधर प्रशासनिक स्तर पर नदी के किनारों को लाइट की व्यवस्था कराई गई, ताकि रेस्क्यू ऑपरेशन जारी रहे। ग्रामीणों की भीड़ भी वहां देर रात तक जुटी रही और जैसे ही बच्चे को सकुशल निकाला गया, सभी ने चैन की सांस ली।

Posted By: Himanshu Sharma

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