राजनांदगांव। Religious News : तेरापंथ धर्म संघ के आचार्य महाश्रमण ने कहा कि 84 लाख योनियों में जीव भटकता है। इसमें मनुष्य भी आ जाता है । मनुष्य का जन्म दुर्लभ होता है, वह सर्वश्रेष्ठ प्राणी होता है। इस जीवन को पाने के लिए सभी जीव तरसते हैं क्योंकि मनुष्य ही ऐसा जन्म है जिसमें साधना करके सिद्धि और मुक्ति दोनों प्राप्त किया जा सकता है। व्यक्ति अच्छा काम भी कर सकता है और अधम काम भी कर सकता है। मनुष्य दुनिया का अधम प्राणी है। आचार्य महाश्रमण जी के प्रवचन से पूर्व स्थानीय गायत्री मंदिर चौक मैं उनके आगमन पर सकल जैन श्री संघ एवं तेरापंथ सभा के अलावा नगर के धर्म प्रेमी लोगों ने उनका स्वागत अभिनंदन किया और उन्हें कामठी लाइन, भारत माता चौक, गंज लाइन से होते हुए उदयाचल तक लेकर आए।

आचार्य ने कहा कि सर्वश्रेष्ठ प्राणी बनने के लिए तथा इस जीवन को सफल बनाने के लिए हमें असत्य से सत्य की ओर, अंधकार से प्रकाश की ओर और मृत्यु से अमृत की ओर अग्रसर होना होगा। इसके लिए सद्गुण का विकास होना आवश्यक है। आत्मा स्थाई है जबकि शरीर अस्थाई है। आत्मा की निर्मलता कैसे हो इस पर हमें विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि आदमी की सरलता से आत्मा में शुद्धता आ जाती है। व्यक्ति अपनी आत्मा की शुद्धि चाहता है तो उसमें रिजुता, सरलता होनी चाहिए।

आचार्य ने कहा कि डाक्टर से अपनी बीमारी मत छुपाओ। जिस आदमी में सरलता होती है उसमें सच्चाई भी होती है। झूठ-कपट का जोड़ा है। इससे बचना है। जीवन में कुटिलता को मत आने दीजिए। उन्होंने कहा कि जिसका हृदय कोमल हो और जो सरल हो, वह मोक्ष प्राप्त कर सकता है। उन्होंने कहा कि ज्ञान बढ़ाना अच्छा है किंतु सरलता खत्म होना नहीं चाहिए। कथनी और करनी में विसंगति ना हो तो सरलता रहती है। जिसके मन में वाणी में एकता है, वह महात्मा है और जिस में एकता नहीं वह दुरात्मा है।जहां बेईमानी है वहां सरलता नहीं रह सकती। सभी की दुकान में एक प्रतिमा रहनी चाहिए और वह प्रतिमा है ईमानदारी की।

उन्होंने कहा कि सभी स्वर्ग जाना चाहते हैं। लेकिन स्वर्ग जाने के लिए मन में सरलता होनी चाहिए और आत्मा में शुद्धि होनी चाहिए। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि एक महात्मा ने धर्मसभा में पूछा कि कौन कौन स्वर्ग जाना चाहता है तब सभी ने हाथ उठाया किंतु एक ने हाथ नहीं उठाया। महात्मा ने उससे पूछा कि आप स्वर्ग नहीं जाना चाहते तो उसने कहा कि मैं स्वर्ग को धरती पर ही लाना चाहता हूं।

आचार्य श्री ने कहा कि जहां अहिंसा समता और सरलता है वहां स्वर्ग आ सकता है। उन्होंने कहा कि सुविधा तो बाहर के संसाधनों से मिल सकती है किंतु अंतर की शांति साधना से ही मिल सकती है। हम शांति को भीतर से प्राप्त कर सकते हैं इस अवसर पर उन्होंने उपस्थित धर्मानुरागियों को सद्भावना, नैतिकता एवं नशामुक्ति की शपथ भी दिलाई।

पूर्व सीएम डा. रमन ने किया अभिनंदन

छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री एवं राजनांदगांव के विधायक डा.रमन सिंह ने आचार्य का अभिनंदन करते हुए कहा कि यह संस्कारधानी का सौभाग्य की गुरु का यहां आगमन हुआ। आचार्य ने अहिंसा यात्रा में राजनांदगांव को भी शामिल किया है, यह राजनांदगांव का सौभाग्य है। उन्होंने कहा कि सुकमा-कोंटा जैसे सुदूर वनांचल में चलना केवल सैन्य बल या फिर आत्मबल के साथ ही संभव है और गुरु ने आत्म बल के साथ सुकमा-कोंटा से छत्तीसगढ़ में प्रवेश किया।

उन्होंने कहा कि आचार्य महाश्रमण जी ज्ञान दर्शन एवं चरित्र के उत्कृष्ट साधक है। आचार्य श्री जहां जाते हैं वहां समाज के सभी वर्गों को तृप्ति होती है। 21 साल पहले छत्तीसगढ़ का निर्माण हुआ था ऐसे नए प्रदेश में किसी संत का आगमन होता है तो यह उस राज्य के लिए सौभाग्य की बात होती है और लोगों में सद्भावना नैतिकता का संचार होता है। उन्होंने कहा कि विधानसभा सत्र चल रहा है। लेकिन वे आचार्य श्री के दर्शन करने चले आए क्योंकि आचार्य श्री के दर्शन और उनके प्रवचन से जीवन का संचार होता है। आचार्य अभिनंदन करते हुए कलेक्टर डीके वर्मा ने कहा कि आपकी यात्रा के उद्देश्य की पूर्ति हो यही वे कामना करते हैं।

0 सिनेमा लाइन को अणुव्रत मार्ग बनाने की घोषणा

महापौर हेमा देशमुख ने कहा कि महाश्रमण के चरण पड़ते ही संस्कारधानी की धरा पुलकित हो उठी है। सद्भावना, नैतिकता और नशा मुक्ति की राह दिखाने उनका नगर आगमन हुआ है। हम संस्कारधानी के लोग इस मार्ग पर चलने का प्रयास करेंगे। उन्होंने इस अवसर पर सिनेमा लाइन सड़क का नाम अणुव्रत मार्ग करने की घोषणा की। बिलासपुर हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति गौतम चौरडिया ने कहा कि मेरी जन्म भूमि पर आपका आगमन होने से यह धरा धन्य हो गया।आपने यहां आकर जन-जन की आत्मा को तृप्त कर दिया। आपके आगमन को हम जन्म-जन्म तक भूल नहीं पाएंगे।

जीवन में गुरु का विशेष महत्व

पूर्व महापौर एवं सकल जैन संघ के अध्यक्ष नरेश डाकलिया ने कहा कि जिसके जीवन में गुरु नहीं होता , उसका जीवन शुरू नहीं होता । गुरु बने बिना जीवन सफल हो सकता है। लेकिन गुरु बनाए बिना जीवन सफल कभी नहीं हो सकता। उन्होंने आचार्य के नगर आगमन को इस शहर का सौभाग्य बताया और उनसे आग्रह किया कि दो दिन का समय और इस शहर को दें। ताकि यहां की जनता उनकी वाणी से अपने को धन्य कर सके।

तेरापंथ सभा के अध्यक्ष राजेंद्र सुराना ने कहा कि एक जनवरी को साध्वी कनक प्रभा जी का नगर आगमन हुआ और आज चार मार्च को गुरुदेव महाश्रमण जी का नगर आगमन हुआ जिससे कि यह शहर धन्य हो गया। संबोधन एवं प्रवचन के पूर्व दिनेश मुनि ने कहा कि मनुष्य चार प्रकार के होते हैं। उन्होंने चारों प्रकार को विस्तार से बताते हुए कहा कि मनुष्य की बुद्धि निर्मल, आचरण शुद्ध, विवेक जागृत, शरीर गतिशील और पराक्रमशील और मन में सहानुभूति होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जो क्रोध नहीं करता उसका चेहरा अच्छा लगता है। उसकी वाणी अच्छी लगती है। इसलिए मधुरता हमारे पास होनी चाहिए विश्वास व्यक्ति को मंजिल तक पहुंचाती है।

Posted By: Ravindra Thengdi

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