राजनांदगांव। नेशनल लोक अदालत में शनिवार को न्यायालयों में लंबित 1941 प्रकरणों का निराकरण किया गया। इसमें ज्यादातर मामले जमीन संबंधी ही थे, जो बीते एक साल से पेंडिंग थे। इन प्रकरणों की सुनवाई के लिए दोनों पक्षों को बुलाकर समझौता कराया गया। सहमती के साथ जब प्रकरणों का निराकरण हुआ तो सभी को न्यायालय की ओर से पौधा भेंट किया गया।

समझौते के बाद दोनों पक्ष के लोग न्यायालय से खुशी-खुशी लौटे। न्यायालयों के अलावा नेशनल लोक अदालत में राजस्व व प्रीलिटिगेशन के 6064 प्रकरण और सिविल प्रकरणों में 14 मामले निराकृत किए गए। इसके अलावा क्लेम में 19 मामले जिसमें कुल राशि एक करोड़ 33 लाख 17 हजार रुपये पारित की गई। वहीं अपराधिक के राजीनामा वाले 208 प्रकरणों के साथ पेटी अफेंस के 1383 मामले का निपटारा लोक अदालत के माध्यम से किया गया।

एक साल से चल रहा था विवाद :

जिला न्यायालय में जमीन संबंधी विवाद पिछले एक साल से लंबित था। इसको लेकर पक्षकार प्रभात और लक्ष्‌मी नारायण के बीच विवाद चल रहा था। बताया गया कि प्रभात ने 80 लाख रुपये की जमीन बेची थी। पर जमीन को लक्ष्‌मीनारायण के नाम से नहीं कर रहा था।

मामला कोर्ट में आने के बाद दो लाख 70 हजार तीन सौ रुपये की फीस तक पक्षकार ने जमा कराई। शनिवार को लोक अदालत में दोनों पक्ष में सुलह कराकर समझौता कराया गया। इसके बाद प्रभात सिंंह को कोर्ट फीस की राशि दो लाख 70 हजार तीन सौ रूपये भी वापस करने का आदेश पारित किया। न्यायाधीश के सामने प्रभात ने लक्ष्‌मीनारायण के नाम पर विक्रयनामा करने की बात कही, जिसके बाद दोनों पक्ष आपसी विवाद को खत्म कर खुशी-खुशी घर लौटे।

प्रथम अपर जिला न्यायाधीश में लंबित मामले को भी लोक अदालत में सुलझा लिया गया है। बताया गया कि लोकनाथ यदु ने अपनी 18 सौ वर्गफीट जमीन शारदा देवी ने खरीदने बयान दिया था। बयाना के रूप में तीन लाख 40 हजार रुपये दिया था, जिसके बाद भी जमीन उनके नाम पर नहीं की गई। एक साल पहले पक्षकार मामले का निपटारा कराने न्यायालय पहुंचे थे, लेकिन दोनों पक्ष में विवाद के चलते निपटारा नहीं हो पाया। नेशनल लोक अदालत में नोटिस देकर दोनों पक्षकारों को बुलाकर समझाइश दी गई। जिसके बाद दोनों ही पक्ष विवाद को खत्म कर सहमत होकर लौटे। लोक अदालत में सभी 39 खंडपीठों के कार्यरत कर्मचारी सहित न्यायाधीश व राजस्व न्यायालय के अधिकारी-कर्मचारी मौजूद रहे।

Posted By: Nai Dunia News Network

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