डोंगरगांव(नईदुनिया न्यूज)। छुरिया ब्लाक के ग्राम केरेगांव में आदिवासी किसान सुरेश नेताम की मौत के मामले पर भाजपा उग्र आंदोलन की तैयारी में है। भाजपा की मांग पर ही किसान के खुदकुशी मामले की उच्च स्तरीय जांच कराई गई, जिसमें यह भी स्पष्ट हो गया कि गिरदावरी रिपोर्ट में लापरवाही की गई है। रकबा कम होने के कारण ही किसान ने परेशान होकर आत्महत्या की। लेकिन विडंबना यह है कि उच्च स्तरीय जांच की रिपोर्ट अब तक कलेक्टर को नहीं मिली है। प्रशासनिक अफसर ही मामले में लापरवाही कर रहे हैं, जिसको लेकर अब जिला भाजपा आंदोलन की तैयारी में है। ज्ञात हो कि बीते 15 दिसंबर को केरेगांव के आदिवासी किसान सुरेश नेताम ने कर्ज और रकबे में की गई कटौती से परेशान होकर खुदकुशी की थी।

किसान की मौत को शासन-प्रशासन ने सामान्य मौत करार दिया। जबकि हकीकत में किसान ने कर्ज और रकबा घटने से परेशान होकर खुदकुशी की थी। मृतक किसान की पत्नी ने भी पति सुरेश की परेशानी को बताया था। भाजपा ने भी इस मामले की शिकायत कर उच्च स्तरीय जांच की मांग की थी। जिसके बाद एडीएम सीएल मारकंडे की टीम ने मामले की जांच की। मृतक सुरेश की जमीनों की नाप तक की गई, जिसमें हकीकत सामने आयी। हालांकि उसकी रिपोर्ट अभी तक कलेक्टर तक नहीं पहुंची हैं, लेकिन पंचनामा में यह स्पष्ट हो गया कि मृतक सुरेश की जिस खसरा 521 को पड़त बताया जा रहा था, वह धनहा जमीन है। बता दें कि मृतक के पास कुल 3.80 एकड़ कृषि भूमि है, जिसमें से केवल 58 डिसमिल भूमि ही पड़त है। हर साल करीब 3.25 एकड़ भूमि में धान की फसल लेकर उसे सोसाइटी के माध्यम से विक्रय करते आ रहे था। पर इस बार राजस्व विभाग की लापरवाही के चलते मृतक सुरेश के मात्र डेढ़ एकड़ धान का पंजीयन हुआ, जिसके चलते ही वो परेशान था। पटवारी और सोसाइटी के भी चक्कर कांटे, लेकिन सुरेश की समस्या का निराकरण नहीं हो पाया। जिससे परेशान होकर सुरेश ने बीते 15 दिसंबर को आत्महत्या कर ली। जांच में राजस्व विभाग के कर्मचारियों की लापरवाही सामने आने के बाद अब भाजपा बड़े आंदोलन की तैयारी में जुट गई है।

पीड़ित परिवार एक करोड़ का मुआवजा दे सरकार : मधुसूदन

केरेगांव के किसान आत्महत्या मामले में भाजपा जिलाध्यक्ष व पूर्व सांसद मधुसूदन यादव ने राज्य सरकार से पीड़ित परिवार को एक करोड़ रुपये का मुआवजा देने की मांग की है। उन्होंने कहा कि सरकार की किसान विरोधी नीति व गिरदावरी के नाम पर किसानों के धान के रकबा में कटौती के चलते पूरे प्रदेश के किसान परेशान हैं। सुरेश ने इसी प्रशासनिक चूक व सरकार की नाकामी के चलते आत्महत्या की है। जिससे आज मृतक सुरेश की पत्नी व तीन बच्चे मुखिया विहीन हो गए हैं। सरकार की नाकामी को छुपाने के लिए जिला प्रशासन इस मामले में लोगों को भ्रमित करते रहे। यादव ने कहा कि जिस तरह प्रदेश के मुखिया अन्य प्रदेश के किसानों को आत्महत्या के मामले में 50 लाख रुपया दे रहा हैं। ठीक उसी प्रकार अपने प्रदेश के किसान मृतक सुरेश नेताम के परिवार को सरकार एक करोड़ का मुआवजा दें।

भाजपा और आदिवासी समाज करेंगे आंदोलन

प्रशासनिक जांच में सच सामने आने के बाद अब भाजपा और आदिवासी समाज आने वाले दिनों में एक बड़े आंदोलन की तैयारी कर रहे हैं। जिला भाजपा के अध्यक्ष मधुसूदन यादव व किसान मोर्चा के जिलाध्यक्ष हीरेंद्र साहू ने केरेगांव के आदिवासी किसान सुरेश नेताम की खुदकुशी मामले में शासन प्रशासन की गलत नीतियों को जिम्मेदारी ठहराया है। उसके परिजनों को न्याय दिलाने भाजपा जमीनी लड़ाई लड़ने को तैयार है। हालांकि आंदोलन को लेकर भाजपा ने अभी तक कोई अधिकृत बयान नही दिया है। इस मामले में केंद्रीय गोंड महासभा धमधागढ़ के अध्यक्ष एमडी ठाकुर ने बताया कि मृतक सुरेश नेताम के आत्महत्या का कारण स्पष्ट हो गया है। अगर सरकार ने एक सप्ताह में उसके परिजनों को एक करोड़ का मुआवजा और दोषियों पर कार्रवाई नहीं करती तो आदिवासी समाज कोरोना गाइडलाइन का पालन किए बगैर ही उग्र आंदोलन करेगी।

Posted By: Nai Dunia News Network

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