सुकमा (नईदुनिया न्यूज)।

जिले के नक्सल मोर्चे पर तैनात जवान आज भी परिजनों से बात करने के लिए जुगाड़ तकनीकी का सहारा ले रहे है। पेड़ पर लकड़ी बांधकर उसमें डोंगल रखते है ताकि इंटरनेट कनेक्ट हो जाए उसके बाद नीचे फाई-वाई के जरिए परिजनों से बात करते है। हालांकि कुछ कैम्पो में मोबाइल नेटवर्क लग गए हैं लेकिन आज भी कुछ ऐसे कैंप है जहां नेटवर्क की समस्या बनी हुई है।

दोरनापाल से जगरगुंडा के बीच करीब एक दर्जन सुरक्षा बल के कैंप स्थापित किए गए हैं। इन कैंपों में सीआरपीएफ, डीआरजी, एसटीएफ, कोबरा व जिला बल के सैकड़ों जवान पदस्थ है। अपने घरों से दूर ये जवान नक्सल मोर्चे पर डटे हुए है। इन अधिकांश कैंपों में मोबाइल नेटवर्क की सुविधा अच्छी है लेकिन कुछ कैंप मौजूद है जहां नेटवर्क की समस्या बनी हुई है। खासकर पुसवाड़ा व चिंतालनार के बीच नेटवर्क काफी कमजोर है। कहीं-कहीं मोबाइल नेटवर्क के माध्यम से सिर्फ बात कर सकते है, लेकिन इंटरनेट का उपयोग नहीं कर सकते।

पेड़ का सहारा ले रहे जवान

नेटवर्क की समस्या से जूझते जवानों ने सोशल मीडिया के लिए जुगाड़ तकनीकी अपना रखी है। जवानों ने कैंप के भीतर पेड़ों पर लंबी लकड़ी को बांध उसमें डब्बा लटका रखा है और रस्सी नीचे तक लटका रखी है। जवान डोंगल लेकर उस डब्बे में डाल देता है। उसके बाद रस्सी के सहारे डब्बे को पेड़ के ऊपर लकड़ी तक पहुचा देते है। ऊंचाई में आने के बाद डोंगल नेटवर्क से कनेक्ट हो जाता है फिर नीचे जवान वाई-फाई के माध्यम से वाट्सएप व सोशल मीडिया का उपयोग कर पाता है। जवानों ने बताया कि नेट काफी स्लो रहता है। कभी-कभी थोड़ा स्पीड रहता है तो वाट्सएप के माध्यम से वीडियो कॉल पर परिजनों का चेहरा दिख जाता है और हम क भी देख लेते है। काफी खुशी होती है जब परिजनों से बात होती है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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