सुकमा (नईदुनिया न्यूज)। शिक्षा को लेकर प्रदेश सरकार गंभीर है, इसलिए जिले में बंद पड़ी स्कूलों को फिर से खोलने का काम किया गया। लेकिन जो स्कूले संचालित है, वहां पर शिक्षा के स्तर का क्या हाल है, उसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि एक स्कूल में आठ बच्चे है, जिनको पढ़ाने के लिए छह शिक्षक पदस्थ किए गए। वहीं दूसरी और बालक आश्रम जिसमें 100 बच्चे अध्यनरत है वहां एकमात्र शिक्षक है। ये हाल जिले के अन्य स्कूलों का भी है। भले ही शिक्षा पर सरकारें करोड़ों खर्च कर रही है, लेकिन व्यवस्था सुधरने का नाम नहीं ले रही है।

गादीरास के पास स्थित उच्च माध्यमिक शाला लेंडीरास जहां वर्तमान में 6वीं में 10 बच्चे दर्ज है, जबकि वहां पर आठ बच्चे ही स्कूल आ रहे है। इन बच्चों को पढ़ाने के लिए छह शिक्षक पदस्थ किए गए जिसमें से दो शिक्षक पदोन्नााति पर कही और संलग्न हो गए है। जानकारी के मुताबिक मोहनलाल वर्मा, सोमेंद्र अधिकारी, राम पटेल, कामेश्वरी ध्रुव, देवनाथ कवाची, देवा कवासी पदस्थ थे, जिसमें से देवनाथ कवाची व देवा कवासी पदोन्नााति में संलग्न कर दिए गऐ। लेकिन वर्तमान में आठ बच्चों के लिए चार शिक्षक पदस्थ है। जबकि यहां पर बच्चे नहीं होने के कारण दो साल से स्कूल बंद था।

बालक आश्रम डब्बारास जो कि वर्तमान में झलियारास में संचालित हो रहा है। आश्रम के साथ-साथ वहां पर स्कूल भी संचालित हो रहा है। इन बच्चों को स्कूल में पढ़ाने के लिए एकमात्र शिक्षक सुरेश सोढ़ी पदस्थ है और वह ही शिक्षक आश्रम अधीक्षक के रूप में कार्यरत है। इन 100 बच्चों को पढ़ाने व आश्रम में रूकवाने की व्यवस्था एकमात्र शिक्षक पर है। वह भी अगर बैठक में बाहर चले जाऐ तो पीछे चपरासी के भरोसे स्कूल व आश्रम दोनों रहती है।

कैसे होगी शिक्षा में गुणवत्ता

गुणवत्ता शिक्षा के लिए केंद्र व राज्य सरकार करोड़ों खर्च कर रही है। लेकिन उसका लाभ आदिवासी बच्चों को नहीं मिल रहा है। कई स्कूल ऐसे है, जहां एकमात्र शिक्षक पदस्थ है। अगर वह बैठक में चले जाऐ ंतो पीछे स्कूल बंद करनी पड़ती है। ऐसे में शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर बात करना भी बईमानी होगी। क्योंकि शिक्षकों के अभाव में बच्चों का भविष्य नहीं सुधर सकता।

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