सुकमा। गरीबों को रोजगार मिले ताकि वह सम्मानपूर्वक जिंदगी जी सके। इसलिए मनरेगा योजना बनाई गई, जिसमें हमारी पार्टी का भी बड़ा योगदान रहा है। लेकिन छत्तीसगढ़ में उस योजना का बुरा हाल है। यहां लोगों को रोजगार नही मिल रहा है, जिनको रोजगार मिल रहा है। उन्हें समय पर मजदूरी नही मिल रही है, जबकि हर दिन भुगतान का नियम है। मुख्यमंत्री बाकी राज्यों में जाकर कांग्रेस को मजबूत कर रहे है। ये अच्छी बात है, लेकिन प्रदेश में भी समय दें और योजनाओं में सुधार लाए। उक्त बातें भारतीय महिला फेडरेशन की सचिव एनी राजा ने कही।

मंगलवार को जिला मुख्यालय स्थित विश्राम गृह में भारतीय महिला फेडरेशन सचिव एनी राजा ने पत्रकारों से चर्चा करते हुए कहा कि शुरुआती दिनों में मनरेगा योजना हर राज्यों ने गड़बड़ी थी, लेकिन समय के साथ उन राज्यों में सुधार हो गया। लेकिन छत्तीसगढ़ में योजना का बुराहाल है। सुकमा जिले में हमारी टीम मनरेगा कार्यो का निरीक्षण किया और सरपंच के साथ मजदूरों से चर्चा की। इसमें पता चला कि यहां दो साल से भुगतान नही हुआ है, जबकि नियम में है कि हर दिन मनरेगा का भुगतान होना है, अगर हर दिन नही होता तो सप्ताह या 15 दिवस में भुगतान होना चाहिए।

ऐसा नहीं हो रहा साथ ही बेरोजगार भत्ता भी नही दिया जा रहा, सरकारी आंकड़ों के मुताबिक इस साल सिर्फ सात फीसदी परिवार को रोजगार मिला है। इसके साथ ही यहां पर मनरेगा में ठेकेदारी प्रथा ज्यादा है, जो कि प्रावधान में है ही नहीं इसके बावजूद यहां पर ठेकेदारी प्रथा चल रही है। इसके साथ ही यहां पर भुगतान में देरी हो रही है, इसके पीछे यह कारण है कि प्रदेश सरकार जो एफटीपी करने में एक सप्ताह में होना चाहिए। उसमें 15 दिन से ज्यादा समय लग रहा है।

भुगतान रिजेक्ट के पीछे डेबिट व क्रेडिट फेलियर

वहीं हाल केंद्र सरकार का भी है। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ में 20 फीसदी भुगतान रिजेक्ट हो जाता है, जबकि केरल में तीन फीसदी रिजेक्ट होता है और देश में नंबर एक पर छत्तीसगढ़ है और दूसरे पर केरल लेकिन दोनों में अंतर काफी है। भुगतान रिजेक्ट के पीछे डेबिट व क्रेडिट फेलियर बताया जा रहा है। जो कि सरकार की कमी है। वहीं एनी राजा ने कहा कि आने वाले दिनों में सोशल आडिट किया जाएगा। इस दौरान रामा सोढ़ी, आराधना मरकाम, मंजू कवासी, आरती कलमू, विजय, अनुज, राजेश नाग, महेश कुंजाम मौजूद रहे।

Posted By: Nai Dunia News Network

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